अडाणी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) ने वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी को जुलाई-सितंबर तिमाही में ₹3,109.05 करोड़ का मुनाफा हुआ है, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹2,445 करोड़ की तुलना में 27.16% अधिक है।
रेवेन्यू ₹10,004 करोड़ के पार पहुंचा
कंपनी का कुल रेवेन्यू इस तिमाही में ₹10,004.06 करोड़ रहा। सिर्फ ऑपरेशनल रेवेन्यू की बात करें तो यह ₹9,167.46 करोड़ रहा, जो साल-दर-साल आधार पर 30% की वृद्धि को दर्शाता है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने ₹7,067.02 करोड़ का ऑपरेशनल रेवेन्यू दर्ज किया था।

नतीजों के बाद शेयर में हल्की गिरावट
मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद, अडाणी पोर्ट्स के शेयर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को कंपनी का शेयर 0.37% फिसलकर ₹1,439.40 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में शेयर ने 2.78% रिटर्न, छह महीने में 6.85%, और एक साल में 6.68% रिटर्न दिया है। फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप ₹3.12 लाख करोड़ है।

देश का सबसे बड़ा पोर्ट ऑपरेटर
अडाणी पोर्ट्स भारत का सबसे बड़ा प्राइवेट पोर्ट्स ऑपरेटर और एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर है। कंपनी के पास देशभर में 13 पोर्ट्स और टर्मिनल हैं, जो भारत की कुल पोर्ट कैपेसिटी के लगभग 24% का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनकी कुल ऑपरेशनल क्षमता 580 MMTPA से अधिक है। पहले इसका नाम गुजरात अडाणी पोर्ट्स लिमिटेड था।
गौतम अडाणी ने 1998 में रखी थी नींव
अडाणी पोर्ट्स की स्थापना गौतम अडाणी ने वर्ष 1998 में की थी। वर्तमान में उनके बेटे करण अडाणी कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर, और अश्वनी गुप्ता इसके सीईओ हैं। कंपनी में लगभग 1,900 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। अडाणी लॉजिस्टिक्स लिमिटेड, अडाणी पोर्ट्स की प्रमुख सब्सिडियरी कंपनी है।
विश्लेषकों की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ और लॉजिस्टिक एक्सपैंशन स्ट्रैटेजी इसे दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक बनाती है। हालांकि, शेयर में निकट भविष्य में मामूली उतार-चढ़ाव संभव है।





