अमेरिका में 1 अक्टूबर से शुरू हुआ सरकारी शटडाउन अब 36वें दिन में पहुंच चुका है। यह अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा शटडाउन बन गया है। इससे पहले, 2018 में ट्रम्प के पहले कार्यकाल के दौरान 35 दिनों तक कामकाज ठप रहा था। इस बार भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतिगत जिद इसके केंद्र में है।

₹1 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान
अमेरिकी कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) के अनुसार अब तक 11 अरब डॉलर (लगभग ₹1 लाख करोड़) का नुकसान हो चुका है। CBO ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति जारी रही तो देश की GDP में 1–2% तक गिरावट आ सकती है। सरकारी खर्च में देरी और कामकाज ठप होने से हर दिन ₹3,300 करोड़ का सैलरी नुकसान हो रहा है। CBO डायरेक्टर फिलिप स्वैगल के मुताबिक— “यह असर अस्थायी जरूर होगा, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होगा। आर्थिक गति पर स्थायी असर पड़ेगा।”
14 लाख कर्मचारी प्रभावित, कर्ज लेकर चल रहा घर
अब तक 6.7 लाख कर्मचारी छुट्टी पर भेजे जा चुके हैं और 7.3 लाख बिना वेतन काम कर रहे हैं। कुल मिलाकर 14 लाख अमेरिकी कर्मचारी अब कर्ज लेकर परिवार चला रहे हैं। साल 2018 में भी ऐसा ही हुआ था, लेकिन इस बार स्थिति और गंभीर है — बैंक लोन डिफॉल्ट और क्रेडिट कार्ड देनदारी बढ़ रही है।

हवाई सेवाएं चरमराईं, उड़ानें रद्द
अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के अनुसार, 31 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच 16,700 उड़ानें देरी से चलीं और 2,282 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। 11,000 एयर ट्रैफिक कंट्रोलरों को सैलरी नहीं मिली है।
FAA ने बताया कि उसके 30 प्रमुख एयरपोर्ट्स में से आधे में स्टाफ की भारी कमी है। परिवहन मंत्री सीन डफी ने कहा— “हम सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए मेहनत कर रहे हैं, लेकिन हमारे कर्मचारी दूसरी नौकरियाँ करके परिवार चला रहे हैं।”
फूड सप्लाई रुकी, 4.2 करोड़ लोग प्रभावित
अमेरिकी एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट (USDA) के पास अब SNAP (फूड स्टैंप) प्रोग्राम के लिए केवल 5 अरब डॉलर का रिजर्व बचा है, जबकि जरूरत 9.2 अरब डॉलर की है। इसके कारण 4.2 करोड़ गरीब अमेरिकियों की फूड सप्लाई पर संकट आ गया है। 25 राज्यों, जिनमें न्यूयॉर्क, कैलिफोर्निया और मैसाचुसेट्स शामिल हैं, ने ट्रम्प प्रशासन पर मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का कहना है कि फूड स्टैंप रोकना गैरकानूनी है और इससे लाखों परिवार भूखमरी का सामना कर सकते हैं।
हेल्थकेयर फंडिंग पर अटका मुद्दा
असल विवाद हेल्थ केयर सब्सिडी को लेकर है। डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि स्वास्थ्य बीमा की सब्सिडी बढ़ाई जाए, जबकि रिपब्लिकन इसके विरोध में हैं। ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि अगर सब्सिडी बढ़ी तो सरकार के खर्च में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे बजट घाटा बढ़ेगा। इसी विवाद के कारण सीनेट में फंडिंग बिल 13 बार पेश हुआ, लेकिन हर बार 60 वोट की जरूरत से 5 वोट कम रह गए।
संसद में ‘फिलिबस्टर’ से अटका बिल
अमेरिकी सीनेट में इस समय फिलिबस्टर की स्थिति है। इस प्रक्रिया के तहत सांसद किसी बिल पर बहस को जानबूझकर लंबा खींच सकते हैं ताकि वोटिंग टल जाए। वोटिंग कराने के लिए “क्लोटर मोशन” में कम से कम 60 सीनेटरों का समर्थन जरूरी होता है। इसी वजह से ट्रम्प का फंडिंग बिल पास नहीं हो पा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि फिलिबस्टर को अल्पसंख्यक दलों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था, लेकिन अब यह राजनीतिक हथियार बन चुका है।
रक्षा और परमाणु सुरक्षा पर भी असर
नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एजेंसी (NNSA) ने अपने 1,400 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा है। एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने कहा— “इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि परमाणु हथियारों की निगरानी और रखरखाव पर असर पड़ा है।”
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी
शटडाउन का असर सिर्फ सरकारी विभागों पर नहीं, बल्कि पूरे निजी क्षेत्र पर दिख रहा है। स्टॉक मार्केट में अस्थिरता बढ़ी है, पर्यटन घटा है और उत्पादक कंपनियों को सप्लाई रुकने से नुकसान हो रहा है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर यह गतिरोध 45 दिन से आगे बढ़ा, तो मंदी (recession) के संकेत दिखने लगेंगे।
अमेरिका का यह शटडाउन केवल राजनीतिक टकराव नहीं, बल्कि एक आर्थिक संकट बन गया है। ट्रम्प प्रशासन और सीनेट में सहमति न बनने के कारण लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह संकट दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर भी असर डाल सकता है।





