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अमेरिकी टैरिफ की मार से भारतीय वस्त्र उद्योग बेहाल

भारत के वस्त्र एवं परिधान उद्योग पर अमेरिकी आयात शुल्क की मार गहराई तक असर दिखा रही है। हाल ही में जारी सर्वे के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप सरकार द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के कारण भारतीय एक्सपोर्टर्स को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस फैसले के बाद से ऑर्डर आधे रह गए हैं और उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

ऑर्डर में आई भारी गिरावट

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कई प्रमुख खरीदारों ने भारतीय कंपनियों से ऑर्डर कम कर दिए हैं। इससे पहले जो कपड़ा और गारमेंट्स का निर्यात तेजी से बढ़ रहा था, अब उसमें लगभग 50 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। भारतीय निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ बढ़ने के कारण उनकी कीमतें प्रतिस्पर्धी नहीं रह गईं और अमेरिकी कंपनियां अब बांग्लादेश, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों से माल मंगवा रही हैं।

लघु उद्योगों पर सबसे ज्यादा असर

इस टैरिफ का सबसे ज्यादा असर छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) पर पड़ा है। पहले से ही बढ़ती लागत और घटती मांग के बीच अब उन्हें मजदूरों की छंटनी करनी पड़ रही है। सर्वे में शामिल 70% से ज्यादा लघु उद्योगों ने बताया कि उन्हें पिछले दो महीनों में ऑर्डर में 40 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट झेलनी पड़ी है।

निर्यात में कमी और रोजगार पर संकट

भारतीय वस्त्र उद्योग देश के सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक है। लेकिन अब इस सेक्टर में मंदी के संकेत साफ दिख रहे हैं।
कई उद्योग संघों ने चेतावनी दी है कि यदि टैरिफ नीति में जल्द बदलाव नहीं हुआ तो अगले छह महीनों में लाखों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं।

सरकार से राहत की मांग

कपड़ा उद्योग से जुड़े संगठनों ने केंद्र सरकार से तत्काल राहत पैकेज की मांग की है। उनका कहना है कि एक्सपोर्ट पर मिलने वाले प्रोत्साहन को फिर से बढ़ाया जाए ताकि उद्योग प्रतिस्पर्धा बनाए रख सके। साथ ही अमेरिका से टैरिफ पर बातचीत शुरू की जाए ताकि भारतीय निर्यातकों को दोबारा बाजार में मौका मिल सके।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर असर

भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्ते इस टैरिफ विवाद के कारण तनावपूर्ण हो गए हैं। भारत, अमेरिका को वस्त्र, हैंडलूम और रेडीमेड गारमेंट्स का बड़ा निर्यातक है। लेकिन अब अमेरिकी मार्केट में भारत की हिस्सेदारी तेजी से घट रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही रहे तो भारत को इस क्षेत्र में अपनी पकड़ खोनी पड़ सकती है।

अमेरिकी टैरिफ नीति का असर न सिर्फ भारत के वस्त्र निर्यात पर बल्कि पूरे व्यापारिक परिदृश्य पर पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई, घटते ऑर्डर और रोजगार संकट के बीच उद्योग जगत सरकार से राहत और स्थिर नीति की उम्मीद कर रहा है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो भारत का वस्त्र उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकता है।

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