बाराँ जिले के अंता विधानसभा उपचुनाव के मद्देनज़र कॉन्टेस्ट में उतरे निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा और उनके परिवार को एक बेहद गंभीर खतरा मिला है। उन्हें तथा उनके पिता के नाम एक धमकी भरा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें ‘रहित गोदारा गैंग’ नाम से 10 लाख रुपये की फिरौती मांग की गई है और स्पष्ट रूप से परिवार को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है।यह पत्र अंता के प्रधान कार्यालय-नयागाँव क्षेत्र में पूर्व सरपंच कल्याण सिंह मीणा के नाम मिला। पत्र में कहा गया कि यदि 10 लाख रुपये नहीं दिए गए, तो “दो तारीख के बाद” नरेश या उनके परिवार को निशाना बनाया जाएगा।समर्थक व मीडिया प्रभारी राकेश भैंसला ने पत्र की प्राप्ति और वायरल होने की पुष्टि की है। परिवार ने तुरंत पुलिस को सूचित कर दिया है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, साथ ही थानाध्यक्ष द्वारा सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने तथा फॉरेंसिक जांच की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।

चुनावी पृष्ठभूमि और माहौल
इस धमकी की घटना उस समय सामने आई है, जब अंता उपचुनाव 11 नवंबर को निर्धारित है और परिणाम 14 नवंबर को घोषित होंगे। इस सीट पर निर्दलीय नरेश मीणा कांग्रेस के टिकट न मिलने के बाद मैदान में उतरे हैं। ऐसे समय में यह धमकी राजनीतिक माहौल में और तनाव को जन्म देती है—क्या यह वास्तव में जानलेवा धमकी है या चुनावी खींचतान का हिस्सा, यह जल्द ही जांच से स्पष्ट होगा।

पुलिस-जांच एवं प्रशासनिक कदम
पुलिस ने शिकायत मिलने पर तुरन्त मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
थानाध्यक्ष द्वारा प्रभावित इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
पत्र में प्रयुक्त ठिकानों/पता-माहौल की तलाशी ली जा रही है।
फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए पत्र को प्रयोग करने की संभावना जताई जा रही है।
वर्तमान में यह स्पष्ट नहीं है कि धमकी वास्तविक है या चुनावी रणनीति के तहत की गई है।
क्या यह चुनावी रणनीति हो सकती है?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स व राजनीतिक हलकों में इस तरह की धारणा व्यक्त की जा रही है कि यह घटना चुनावी रणनीति या विरोधी दलों द्वारा बदनाम करने की चाल हो सकती है। अभी तक इस दावे को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।ऐसे में, उम्मीदवार, उनकी टीम व प्रशासन सभी सतर्क हैं। यदि धमकी वास्तविक पाई जाती है, तो यह गंभीर अपराध के दायरे में आता है और राज्य निर्वाचन-प्रक्रिया तथा सुरक्षित चुनाव-परिस्थिति के लिए चिंता का विषय है।इस घटनाक्रम ने अंता उपचुनाव के प्रति सार्वजनिक दृष्टिकोण व राजनीतिक तापमान को और संवेदनशील बना दिया है। यह जरूरी हो गया है कि प्रशासन, पुलिस व निर्वाचन-अधिकारियों द्वारा निर्भीक व त्वरित कार्रवाई हो ताकि मतदाता व उम्मीदवार दोनों के सुरक्षित माहौल में सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
संवाददाता_घनश्याम दाधिच
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