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अविकानगर भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान की टीएसपी उपयोजना के तहत दौसा जिले में भगवान बिरसा मुंडा पर संगोष्ठी और जनजाति किसानों को सामग्री वितरण

अविकानगर (राजस्थान),  संवाददाता: सुरेश चौधरी

 

भाकृअनुप- केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर की टीएसपी (अनुसूचित जनजाति उपयोजना) के तहत दौसा जिले के जनजाति बहुल क्षेत्रों में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य भारत सरकार द्वारा जनजाति गौरव वर्ष पखवाड़ा 2025 के अंतर्गत जनजाति समाज को जागरूक करना और विकास की मुख्यधारा से जोड़ना था।इस कार्यक्रम में दौसा जिले के मलवास, हापावस, पालूदा एवं पापाडदा पंचायतों के 130 महिला एवं 13 पुरुष किसानों ने भाग लिया।कार्यक्रम में निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर एवं टीएसपी टीम ने उपस्थित जनजाति किसानों से संवाद स्थापित किया और भारत सरकार की जनजाति मंत्रालय द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी दी।

 

भगवान बिरसा मुंडा की जीवनी और विचारों पर चर्चा

डॉ. अरुण कुमार तोमर ने अपने संबोधन में भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, उनके संघर्ष और समाज सुधार के कार्यों पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि —“भगवान बिरसा मुंडा के आदर्श आज भी हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी सोच आत्मनिर्भरता, शिक्षा और सामाजिक उत्थान की दिशा दिखाती है।”उन्होंने जनजाति समुदाय से आग्रह किया कि वे बिरसा मुंडा की कार्यशैली और आत्मनिर्भरता के विचारों को अपने जीवन में अपनाएं।

 

भारत सरकार के विकास कार्यों और कौशल विकास पर जोर

निदेशक डॉ. तोमर ने भारत सरकार द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में किए जा रहे बुनियादी विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा की।उन्होंने कहा कि आज के समय में कौशल विकास और आत्मनिर्भरता ही जनजाति परिवारों केसशक्तिकरण की कुंजी है।उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि कृषि और पशुपालन में वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने से आजीविका के नए अवसर बन सकते हैं।

 

कृषि एवं पशुपालन सामग्री का वितरण

कार्यक्रम के दौरान सभी 143 जनजाति लाभार्थियों को टीएसपी उपयोजना के अंतर्गत कृषि और पशुपालन संबंधी आवश्यक सामग्री वितरित की गई।
इसमें —

स्टील की बाल्टियाँ,

रबी सीजन की सब्जियों के बीज किट,

मिनरल मिक्सचर ईंटें शामिल थीं।

इन सामग्रियों की उपयोगिता और सही तरीके से इस्तेमाल करने के निर्देश डॉ. अरुण कुमार तोमर ने स्वयं किसानों को दिए।

 

वैज्ञानिकों ने दी भेड़-बकरी पालन की जानकारी

कार्यक्रम के अंत में अविकानगर की वैज्ञानिक टीम ने उपस्थित किसानों को भेड़ और बकरी पालन के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी।टीम ने बताया कि सही आहार, देखभाल और प्रबंधन से जनजाति किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।इन सभी ने किसानों के साथ संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और भविष्य में तकनीकी सहायता का भरोसा दिया।केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम न केवल जनजाति किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम था, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के विचारों को व्यवहार में लाने का भी संदेश देता है।संस्थान की यह पहल ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता की राह पर जनजाति समाज के लिए प्रेरणादायक सिद्ध हो रही है।

 

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