जोधपुर, संवाददाता: कपिल सांखला
जोधपुर के बासनी औद्योगिक क्षेत्र प्रदूषण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। यहां की सड़कों पर बह रहे केमिकल युक्त पानी ने इलाके के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर दिया है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पिछले कई महीनों से यह समस्या बनी हुई है, बावजूद इसके प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
केमिकल युक्त पानी का खतरा
स्थानीय निवासियों के अनुसार बासनी औद्योगिक क्षेत्र की सड़कों पर बहता प्रदूषित पानी न सिर्फ जमीन और खेतों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है। केमिकल युक्त पानी से त्वचा संबंधी समस्याएं, एलर्जी, आंखों की चोट और गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो गया है। साथ ही, यह पानी कई बार घरों के नालों में घुस जाता है और पीने के पानी को भी दूषित कर देता है।
स्थानीय निवासियों की परेशानियां
रिहायशी इलाके के लोग बता रहे हैं कि केमिकल युक्त पानी से दुकानदार, व्यवसायी और आम जनता सभी प्रभावित हो रहे हैं। बासनी गांव के मेघवाल ढाणी में भी यह पानी घुस गया था, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों को रोजाना गंदे पानी के संपर्क में आना पड़ता है और उनके दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
नालों की सफाई और प्रशासन की लापरवाही
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रीको के नालों की सफाई के लिए ठेका दिया जाता है, लेकिन काम वर्षों से नहीं हो रहा। कचरे से भरे नाले पानी की निकासी रोक रहे हैं। प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सांगरिया के JPNT प्लांट तक की केमिकल लाइन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
सुप्रीम कोर्ट और NGT के आदेश की अवहेलना
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने साफ आदेश दिए थे कि सड़कों और खेतों तक प्रदूषित पानी को रोकना आवश्यक है। इसके अलावा, नदी में प्रदूषण रोकने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी निर्देश जारी किए गए। लेकिन जोधपुर के अधिकारी इन आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
प्रभावित क्षेत्र और खतरे के क्षेत्र
प्रदूषण के कारण प्रभावित क्षेत्र केवल बासनी औद्योगिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। आसपास के ग्रामीण इलाके भी खतरे में हैं। कई जगहों पर केमिकल युक्त पानी घरों और नालों में घुस गया, जिससे लोगों के जीवन पर सीधा असर पड़ा है।
स्थानीय निवासियों की चेतावनी
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन और अधिकारियों को चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि नालों की सफाई कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
स्थायी समाधान की आवश्यकता
बासनी औद्योगिक क्षेत्र प्रदूषण की समस्या केवल अस्थायी उपायों से नहीं सुधरेगी। आवश्यक है कि नालों की नियमित सफाई, ठेका कंपनियों पर निगरानी, प्रदूषण रोकने वाली तकनीकी प्रणाली और निरंतर पर्यावरण निरीक्षण लागू किया जाए। केवल इस तरह ही इलाके को प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
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