अमेरिका द्वारा रूसी तेल कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत के लिए रवाना हुआ एक रूसी तेल टैंकर बीच रास्ते में ही यू-टर्न लेकर लौट गया। ‘फ्यूरिया’ नाम का यह विशाल टैंकर रूस की सरकारी कंपनी रोसनेफ्ट का तेल लेकर भारत के गुजरात स्थित सिक्का पोर्ट की ओर बढ़ रहा था, लेकिन अब इसकी दिशा बदल चुकी है।
फ्यूरिया टैंकर में था 7.3 लाख बैरल तेल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फ्यूरिया टैंकर ने 20 अक्टूबर को रूस के बाल्टिक बंदरगाह प्रिमॉर्स्क से करीब 7,30,000 बैरल ‘यूराल क्रूड’ लोड किया था।
इसका डेस्टिनेशन शुरू में भारत का सिक्का पोर्ट बताया गया था, जहां रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारत पेट्रोलियम (BPCL) की रिफाइनरियां स्थित हैं। टैंकर को नवंबर मध्य तक भारत पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन मंगलवार को इसने अचानक दिशा बदल ली।
अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद लिया यू-टर्न
यह यू-टर्न ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने 22 अक्टूबर को रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों — रोसनेफ्ट और लुकोइल — को अपनी ब्लैकलिस्ट में शामिल किया।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने वैश्विक बैंकों और कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे इन संस्थाओं से जुड़ी लेन-देन गतिविधियों को रोक दें। ऐसे में भारत की ओर आ रहा रूसी टैंकर किसी तरह के भुगतान या बीमा संबंधी जोखिम से बचने के लिए रास्ता बदल सकता है।
अब मिस्र की ओर बढ़ा जहाज
जहाज के ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, फ्यूरिया ने अब अपनी मंजिल मिस्र के पोर्ट सईद के रूप में अपडेट की है।
चूंकि रूस से भारत आने का सबसे तेज़ मार्ग स्वेज नहर से होकर गुजरता है, इसलिए जहाज आमतौर पर पोर्ट सईद को अस्थायी डेस्टिनेशन बताते हैं। फिर भी, विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार जहाज ने दिशा बदलने का निर्णय किसी राजनैतिक या तकनीकी कारण से लिया है।
टैंकर की उम्र भी बनी चिंता का कारण
फ्यूरिया टैंकर की उम्र 23 वर्ष हो चुकी है, जबकि सामान्य रूप से तेल टैंकरों की अधिकतम सेवा सीमा 18 वर्ष मानी जाती है।
यूरोपियन यूनियन (EU) और ब्रिटेन पहले ही इस जहाज को पुराने और जोखिमपूर्ण जहाजों की श्रेणी में रख चुके हैं। अब डेनमार्क सहित कई यूरोपीय देश अपने समुद्री जलक्षेत्र से गुजरने वाले पुराने टैंकरों की जांच सख्त कर रहे हैं, जिससे जहाजों को अपनी दिशा बदलनी पड़ सकती है।
भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति पर असर की आशंका
रूस पिछले दो वर्षों से भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद भारत ने सस्ते रूसी क्रूड की खरीद बढ़ाई थी। अगर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते रूस से तेल आयात में बाधा आती है, तो इसका असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनरी संचालन लागत पर पड़ सकता है। हालांकि, भारतीय अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और वैकल्पिक सप्लाई चेन पर काम किया जा रहा है।






