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Bhagyashree Opens Up on Menopause: एक्ट्रेस बोलीं — हर छोटी बात पर रोती थी, पति से कहा ‘थोड़ा ध्यान दो’

मुंबई — बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस भाग्यश्री (Bhagyashree) ने हाल ही में अपने जीवन के बेहद निजी और कठिन दौर पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि मेनोपॉज फेज उनके लिए कितना भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण रहा।एक इंटरव्यू में भाग्यश्री ने कहा,मेनोपॉज के दौरान मैं बहुत जल्दी इमोशनल हो जाती थी। छोटी-छोटी बातों पर रोने लगती थी। कई बार खुद को समझाना मुश्किल होता था कि ऐसा क्यों हो रहा है।”भाग्यश्री ने बताया कि इस फेज ने उन्हें अपने शरीर और मानसिक स्वास्थ्य के बारे में और जागरूक बनाया।

 

पति हिमांशु से मांगी थी इमोशनल सपोर्ट

 

इस बातचीत के दौरान भाग्यश्री ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने पति हिमांशु से खुलकर अपनी परेशानियां शेयर कीं।मैंने उनसे कहा कि मुझे अब पहले जैसा ध्यान चाहिए। यह वक्त मेरे लिए बहुत अलग है, थोड़ा और अटेंशन दो। जब किसी का साथ और समझ मिलती है, तो मुश्किल वक्त आसान हो जाता है।”भाग्यश्री ने यह भी बताया कि महिलाओं को इस फेज के दौरान अपने पार्टनर और परिवार के साथ खुलकर बात करनी चाहिए। ऐसा करने से तनाव और अकेलापन काफी हद तक कम हो सकता है।

 

क्या होता है मेनोपॉज?

 

मेनोपॉज एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जो आमतौर पर महिलाओं में 45 से 55 साल की उम्र के बीच होती है।इस दौरान शरीर में हॉर्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे कई शारीरिक और मानसिक लक्षण दिखाई देते हैं जैसे —मूड स्विंग्स थकान और नींद की कमी हॉट फ्लैशेज वजन बढ़ना भावनात्मक अस्थिरता भाग्यश्री ने कहा कि इस समय महिला के शरीर को “नया बैलेंस” चाहिए होता है, इसलिए सेल्फ-केयर और पॉजिटिविटी जरूरी है।

 

सोशल मीडिया पर फैंस ने की तारीफ

 

भाग्यश्री के इस बयान के बाद फैंस सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं।कई महिलाओं ने लिखा कि उन्होंने पहली बार किसी बॉलीवुड स्टार को इतनी ईमानदारी से इस मुद्दे पर बोलते देखा है।Instagram पर उनके फैंस ने लिखा —आपने जो बोला वो हमारे दिल की बात है।”आपने मेनोपॉज को लेकर जो जागरूकता फैलाई है, वो काबिल-ए-तारीफ है।”उनकी इस पहल से कई महिलाओं को हिम्मत मिली है कि वे भी इस फेज को खुले दिल से स्वीकारें और जरूरत पड़ने पर मदद लें।

 

महिलाओं के लिए भाग्यश्री का संदेश

 

भाग्यश्री ने महिलाओं को सलाह दी कि वे इस फेज को कमजोरी न मानें बल्कि इसे जीवन का नया अध्याय समझें।उन्होंने कहा —मेनोपॉज कोई अंत नहीं है, बल्कि यह समय खुद से जुड़ने का है। अपने शरीर और मन की बात सुनें, हेल्दी खाएं, एक्सरसाइज करें और खुश रहें।”उन्होंने डॉक्टर से नियमित चेकअप कराने और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की भी बात कही।

 

मेनोपॉज पर जागरूकता क्यों जरूरी है?

 

भारत में अब भी कई महिलाएं मेनोपॉज के बारे में खुलकर बात नहीं करतीं।यह न केवल शारीरिक बदलावों से जुड़ा विषय है, बल्कि मानसिक संतुलन और पारिवारिक सपोर्ट से भी सीधा संबंध रखता है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज के समय परिवार का साथ, सही डाइट, और काउंसलिंग महिलाओं को बहुत राहत दे सकती है।

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