बारां, संवाददाता: जयप्रकाश शर्मा
तहसील क्षेत्र के बोहत गांव के वार्ड नंबर 1 से 11 तक बने मकानों में पेयजल संकट बना हुआ है। सायगढ़ पेयजल परियोजना के तहत फिल्टर युक्त पानी की आपूर्ति का दावा किया गया, लेकिन हकीकत यह है कि कई वार्डों में आज भी नलों से पानी नहीं आ रहा है।
सायगढ़ पेयजल परियोजना का दावा
ग्रामीणों के अनुसार सायगढ़ पेयजल परियोजना के तहत गांव में दो पेयजल टंकियों से करीब 5 लाख 70 हजार लीटर क्षमता का पानी भरा जाता है। इसके बावजूद वार्डों के नलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा, जिससे योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किन वार्डों में सबसे ज्यादा समस्या
वार्ड नंबर 1 गौलाना बस्ती और वार्ड नंबर 9 गढ़ मोहल्ला में हालात बेहद खराब हैं। इन दोनों वार्डों में जल मिशन योजना के तहत सायगढ़ पेयजल परियोजना की लाइन डाली गई थी, लेकिन नलों में पानी नहीं आने से लोग परेशान हैं।
तीन साल से नलों में पानी नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि करीब तीन साल पहले लाइन बिछा दी गई थी, लेकिन आज तक नलों में नियमित पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो पाई। नल कनेक्शन होने के बावजूद पानी नहीं मिलना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
ग्रामीणों को फ्लोराइड पानी पीने की मजबूरी
वार्ड 9 के गढ़ मोहल्ला निवासी राकेश मालव, मुकेश मालव, पियूष मालव, जितेंद्र मेहरा, दिनेश मीणा, अजय मालव, रामावतार मालव और निर्मल मालव ने बताया कि मजबूरी में उन्हें सार्वजनिक हैंडपंप या निजी नलकूप का फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है, जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।
शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं
ग्रामीणों ने बताया कि विभाग, ग्राम पंचायत और मुख्यमंत्री पोर्टल तक कई बार शिकायत की जा चुकी है। सायगढ़ पेयजल परियोजना के सहायक अभियंता को भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
पानी की बर्बादी भी बड़ी वजह
Boht Village Water Problem में नलों पर टोंटी नहीं होना भी कारण बताया गया। ग्रामीणों का कहना है कि निचले क्षेत्र के कई मकानों में नलों पर टोंटी नहीं लगी है। पानी आने पर लोग नलों से पानी भरने के बाद भी पानी बहता छोड़ देते हैं, जिससे भारी मात्रा में पानी व्यर्थ हो जाता है। यदि सभी घरों में टोंटी लगाई जाए, तो ऊपरी क्षेत्र के मकानों तक भी पानी पहुंच सकता है।
पंप चालक का पक्ष
Boht Village Water Problem को लेकर पंप चालक ने भी स्थिति स्पष्ट की। पंप चालक का कहना है कि वे उपभोक्ताओं को नलों में टोंटी लगाने की समझाइश करते हैं, लेकिन कई लोग इस बात पर झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। इस समस्या को लेकर उन्होंने कई बार पंचायत और विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया है।
पंचायत और विभाग की लापरवाही
Boht Village Water Problem में पंचायत और विभाग की निष्क्रियता सामने आई। ग्रामीणों का आरोप है कि न तो ग्राम पंचायत प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले रहा है और न ही संबंधित विभाग कोई ठोस कदम उठा रहा है। नतीजा यह है कि गांव के लोग आज भी शुद्ध पेयजल से वंचित हैं। सायगढ़ पेयजल परियोजना के बावजूद बोहत गांव में नलों से पानी नहीं आना चिंता का विषय है। यदि जल्द ही पानी की बर्बादी रोकी जाए और वितरण व्यवस्था सुधारी जाए, तो ग्रामीणों को फ्लोराइड युक्त पानी पीने की मजबूरी से राहत मिल सकती है।
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