उमाशंकर शर्मा, टोडारायसिंह। कस्बे के पदम प्रभु जिनालय में शनिवार को 20वां सुंदर विजय पावन वर्षा योग 2025 चातुर्मास निष्ठापन कार्यक्रम बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर चातुर्मास में स्थापित मंगल कलश को पुण्यार्जक परिवारों के घर परम पूज्य चारित्र महोदघि आर्यिका 105 श्री विष्णु प्रभा माताजी के करकमलों से स्थापित किया गया। इस दौरान पूरा समाज भक्तिभाव से ओतप्रोत दिखाई दिया।
मंगल कलश स्थापना समारोह का शुभारंभ
सुबह से ही पदम प्रभु जिनालय परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा। समाज के लोग बैंड बाजों के साथ नाचते-गाते हुए माताजी के सानिध्य में मंगल कलश स्थापना हेतु विभिन्न पुण्यार्जक परिवारों के घर पहुंचे। प्रत्येक परिवार ने अपने-अपने घरों पर आरती, पूजा और स्वागत के साथ माताजी का अभिनंदन किया। यह दृश्य पूरे कस्बे में आध्यात्मिक माहौल बना गया।
पुण्यार्जक परिवारों के घर हुई मंगल स्थापना
इस अवसर पर श्रेष्ठी नरेन्द्र कनोई, अध्यक्ष चातुर्मास व्यवस्था समिति, मोहन लाल कनोई, विमल कनोई, मनोज कुमार कनोई (डबली), मुकेश कनोई, गिरनार कनोई और नवीन छाबड़ा के घर माताजी ससंघ के सानिध्य में मंगल कलश स्थापित किए गए। प्रत्येक परिवार के घर समाज बंधु, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कलश स्थापना के समय मंत्रोच्चार और भक्ति गीतों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।
सौभाग्य कलश ड्रा में मिला विशेष पुण्य
कार्यक्रम के दौरान सौभाग्य कलश के लिए लक्की ड्रा कूपन प्रणाली अपनाई गई। इसमें चयनित पुण्यार्जक श्याम सुंदर जगदीश प्रसाद टोरडी वाले को सौभाग्य कलश का सम्मान प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं और इस विशेष पुण्य का उत्सव मनाया।
समाजजनों की उपस्थिति और भक्ति भावना
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी महिलाएं, पुरुष और बच्चे उपस्थित रहे। सभी ने माताजी ससंघ के चरणों में नमन किया और अपने जीवन में धर्म, संयम व सेवा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। माताजी के करकमलों से कलश स्थापना को सभी परिवारों ने अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण बताया।
चातुर्मास का महत्व और माताजी का आशीर्वचन
प. पू. श्री विष्णु प्रभा माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि चातुर्मास आत्मशुद्धि और आत्मविकास का काल होता है। इस दौरान साधना, संयम और सेवा के माध्यम से जीवन में शांति और सकारात्मकता आती है। उन्होंने कहा कि मंगल कलश स्थापना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि समाज के एकजुटता और सद्भाव का प्रतीक है।
समापन पर भक्ति गीतों से गुंजा जिनालय
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक आरती, भक्ति गीतों और जयकारों से जिनालय परिसर गूंज उठा। समाजजनों ने माताजी के सानिध्य में भक्ति भाव से ‘जय गुरु मां’ और ‘भगवान की जय’ के नारे लगाए। चातुर्मास निष्ठापन समारोह का यह दिन सभी उपस्थित लोगों के लिए अत्यंत मंगलमय और प्रेरणादायी बन गया।
संवाददाता umashankar
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