बीजिंग | चीन के दक्षिणी प्रांत युन्नान में गुरुवार सुबह हुए भीषण रेल हादसे ने पूरे देश में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुनमिंग शहर के लुओयांगजेन रेलवे स्टेशन पर भूकंप मॉनिटरिंग उपकरण की टेस्टिंग के लिए चल रही एक टेस्ट ट्रेन ने ट्रैक पर काम कर रहे कर्मचारियों को जोरदार टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में 11 कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 2 गंभीर रूप से घायल हैं।
यह दुर्घटना इसलिए भी बेहद गंभीर मानी जा रही है क्योंकि चीन में पिछले डेढ़ दशक में इस तरह का हादसा दोबारा हुआ है। इससे पहले 2011 में झेजियांग प्रांत में हुए हादसे में 40 लोगों की जान गई थी, जिसे चीन की रेलवे इतिहास की सबसे बड़ी दुर्घटनाओं में गिना जाता है।
कैसे हुआ हादसा?
घटना उस समय हुई जब रेलवे कर्मचारी टर्निंग ट्रैक के एक हिस्से की मरम्मत और निरीक्षण में लगे हुए थे। इसी दौरान टेस्ट ट्रेन नंबर 55537, जो भूकंप से जुड़े साइज्मिक इक्विपमेंट की जांच कर रही थी, अचानक उसी ट्रैक पर आ गई और कर्मचारियों को रौंद दिया। घटना के तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया और घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया। चीन के सरकारी टीवी चैनल CCTV के अनुसार, हादसे के सही कारणों की जांच जारी है, जबकि कुनमिंग रेलवे अथॉरिटी ने सोशल मीडिया पर पीड़ितों के परिवारों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है।
चीन की रेल सुरक्षा पर फिर सवाल
दुनिया का सबसे बड़ा 1,60,000 किलोमीटर का रेलवे नेटवर्क चलाने वाला चीन अपनी हाई-स्पीड रेल को दुनिया की सबसे आधुनिक और सुरक्षित बताता है। हाई-स्पीड ट्रेनों के मुख्य रूट ऑटोमैटिक सिस्टम पर चलते हैं, जहां मानवीय गलती की संभावना बेहद कम होती है। लेकिन जब बात ट्रैक मरम्मत, तकनीकी जांच या टेस्टिंग की होती है, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। चीन में पिछले कई बड़े हादसे उसी समय हुए हैं जब कर्मचारी पटरियों पर काम कर रहे थे और ट्रेनें टेस्ट रन पर थीं। 2021 में गांसू प्रांत में भी इसी तरह की दुर्घटना में 9 लोगों की मौत हुई थी।
कम्युनिकेशन की कमी सबसे बड़ा कारण
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटनाओं की जड़ में तकनीकी खामी नहीं, बल्कि कम्युनिकेशन गैप है। अक्सर ग्राउंड टीम, कंट्रोल सेंटर और ड्राइवर के बीच यह स्पष्ट नहीं होता कि:
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कौन सा ट्रैक बंद है या खुला,
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ट्रेन किस दिशा से आ रही है,
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सिग्नलिंग सिस्टम में अस्थायी बदलाव किया गया है या नहीं।
चीन में रेलवे विस्तार बहुत तेज है, जिसके चलते काम का दबाव भी अधिक रहता है। कई बार मरम्मत का कार्य सीमित समय या रात में करना पड़ता है, जिससे गलतियों की संभावना और बढ़ जाती है। इसके अलावा, चीन में हादसों की जांच रिपोर्टें अक्सर सार्वजनिक नहीं होतीं, जिसकी वजह से पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं। 2011 के बड़े हादसे के बाद भी चीन ने रिपोर्ट जारी नहीं की थी, जिससे देशभर में बड़ी आलोचना हुई थी।






