लोक आस्था के पर्व छठ पर महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य
लोक आस्था के महापर्व **छठ पूजा** की आस्था और भक्ति का नजारा सोमवार को देशभर के घाटों पर देखने को मिला। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। जैसे ही सूर्य की लालिमा क्षितिज में ढली, घाटों पर “छठ मईया” और “जय सूर्य देव” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा
चार दिवसीय पर्व में आज था ‘संध्या अर्घ्य’ का दिन
छठ पर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, इसके बाद खरना, संध्या अर्घ्य और अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इसका समापन होता है। सोमवार को पर्व का तीसरा दिन था, जिसे **‘संध्या अर्घ्य’** कहा जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं साफ-सुथरे कपड़ों में घाटों पर पहुंचीं, गन्ने के खंभों से सजाए गए छठ घाटों पर उन्होंने पूजा की तैयारी की और बांस की टोकरी में ठेकुआ, केला, नारियल, और गन्ने जैसी सामग्रियों के साथ सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया।
देशभर के घाटों पर उमड़ा जनसैलाब
बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, और नेपाल के तराई क्षेत्रों में छठ पूजा की रौनक देखते ही बन रही है। पटना के **गंगा घाट**, दिल्ली के **यमुना घाट**, नोएडा और गाजियाबाद के छठ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हर उम्र के लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए और गंगा व यमुना के तटों पर भक्तिमय माहौल बना रहा।
सुरक्षा और सफाई के विशेष इंतजाम
दिल्ली, पटना और कई अन्य शहरों में प्रशासन की ओर से सुरक्षा और स्वच्छता के विशेष इंतजाम किए गए हैं। घाटों पर पुलिस बल, गोताखोर और मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं। पटना में गंगा के किनारे विशेष घाट बनाए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। वहीं दिल्ली में यमुना नदी के किनारे **कालिंदी कुंज, मयूर विहार, और आईटीओ घाट** पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे।
सूर्य उपासना और आस्था का संगम
छठ पर्व सूर्य उपासना का अद्भुत प्रतीक है। इस पर्व में सूर्य देव और छठी मइया की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि सूर्य की उपासना से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का संचार होता है। व्रती महिलाएं पूरे उपवास के दौरान बिना जल ग्रहण किए दिन-रात पूजा में लीन रहती हैं, जो इस पर्व को और भी पवित्र बनाता है।
महिलाओं ने किया लोकगीतों और भजनों से वातावरण भक्तिमय
घाटों पर व्रती महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत गाए — “केलवा जे फरेला घवद से, ओ पिया…”, “छठी मइया तोहार महिमा अपार…” जैसे गीतों से पूरा माहौल भक्ति और आस्था से भर गया। छोटे बच्चे दीप लेकर घाटों के किनारे दौड़ते नजर आए तो पुरुष श्रद्धालु पूजा में सहयोग करते दिखाई दिए।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इस बार कई जगहों पर छठ पूजा में **इको-फ्रेंडली पूजा सामग्री** का उपयोग किया गया। प्रशासन ने प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक लगाई और लोगों से अपील की कि वे घाटों की स्वच्छता बनाए रखें। श्रद्धालुओं ने भी नदी को साफ रखने का संकल्प लिया।
उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ होगा समापन
मंगलवार सुबह व्रती महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन करेंगी। यह क्षण इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक पल होता है। मान्यता है कि इस समय की गई प्रार्थना से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।





