अलवर के चर्चित D-Mart स्टोर में एक बड़ा फ्रॉड सामने आया है, जिसे प्रशासन ने “साइलेंट बारकोड स्कैम” का नाम दिया है। स्टोर में कई महीनों से ऐसा सिस्टम चलाया जा रहा था, जिसमें महंगे सामान पर सस्ते बारकोड चिपकाकरबिलिंग की जा रही थी। इस चालाकी से उत्पाद कम कीमत पर बिक रहे थे—लेकिन नुकसान D-Mart को हो रहा था या किसी और को, यह जांच का विषय है।इस मामले ने न केवल बड़े रिटेल स्टोर्स की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी साबित किया है कि फ्रॉड करने वाले तकनीक को कितनी चालाकी से इस्तेमाल कर रहे हैं।
कैसे चल रहा था यह ‘साइलेंट स्कैम’?
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह फ्रॉड बेहद साइलेंट तरीके से किया जा रहा था, जिसमें कोई शोर-शराबा नहीं, कोई झगड़ा नहीं—बस एक छोटा बारकोड ट्रिक और हजारों का खेल।फ्रॉड के तरीके:महंगे प्रोडक्ट पर कम कीमत वाले बारकोड चिपकानाबिलिंग काउंटर पर QR स्कैनिंग में धोखा देनाअसली बारकोड हटाकर नए प्रिंटेड बारकोड लगानास्टोर की निगरानी टीम को चकमा देनाइससे ऐसे प्रोडक्ट जिनकी कीमत 800–900 रुपये थी, उन्हें 150–200 रुपये में बिल कर दिया जाता था।फ्रॉड का पैटर्न दिखाता है कि यह कोई एक-दो बार की गलती नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से चलाया गया स्कैम था।
शिकायत कैसे पहुँची अधिकारियों तक?
मामला तब पकड़ा गया जबकुछ प्रोडक्ट की कीमतें लगातार गड़बड़ पाई गईंस्टॉक मैनेजमेंट सिस्टम में mismatch दिखाकई आइटम स्टॉक से गायब लेकिन बिलिंग में उनके भाव बेहद कम दर्जD-Mart प्रबंधन ने जब इन शंकाओं की जांच की तो सामने आया कि किसी ने जानबूझकर बारकोड बदलकर बिलिंग को प्रभावित किया है।इसके बाद स्टोर ने स्थानीय पुलिस को शिकायत दर्ज करवाई।
प्राथमिक जांच में क्या सामने आया?
पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया:बारकोड बदलने का काम स्टोर के अंदर ही किया जा रहा थाकोई अंदरूनी व्यक्ति (या टीम) इसमें शामिल हो सकता हैबाहर के ग्राहकों की भी मिलीभगत से इनकार नहींFraud प्रिंटेड बारकोड मशीन के जरिए किए गएCCTV फुटेज में संदिग्ध गतिविधियाँ दिखाई दींजांच अधिकारी इसे संगठित रिटेल फ्रॉड मान रहे हैं।
D-Mart को हो रहा था कितना नुकसान?
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार—रोजाना हजारों रुपये का नुकसान हो रहा थाकुछ प्रोडक्ट में 70–80% का मूल्य अंतरबड़े स्केल पर नुकसान लाखों तक पहुँच सकता हैरिटेल इंडस्ट्री में बारकोड फ्रॉड, इन्वेंट्री लीक और शॉपलिफ्टिंग आज बड़ी चुनौतियाँ हैं।लेकिन D-Mart जैसा बड़ा चेन स्टोर भी इसका शिकार बन सकता है—यह चौंकाने वाली बात है।
ग्राहकों पर कोई आरोप?
फिलहाल पुलिस ने ग्राहकों पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया है, लेकिन यह जांच का हिस्सा है।संभावना जताई जा रही है कि:कुछ ग्राहक फ्रॉड का हिस्सा थेकुछ अनजान होकर भी कम कीमत देखकर प्रोडक्ट ले रहे थेकई बार खुद स्टाफ बारकोड बदलकर ग्राहकों को दे देते थेजांच टीम हर एंगल पर काम कर रही है।
स्टोर प्रबंधन ने क्या कदम उठाए?
D-Mart ने बारकोड स्कैनिंग और सिक्योरिटी को लेकर कई बदलाव किए हैं:सभी बारकोड को मैनुअल + डिजिटल क्रॉस-चेकस्कैनर सिस्टम अपडेटसुरक्षा गार्ड की संख्या में वृद्धिस्टॉक वेरीफिकेशन हर 48 घंटे मेंCCTV की मॉनिटरिंग बढ़ाई गईप्रबंधन ने साफ कहा है कि आगे से ऐसा फ्रॉड नहीं होने दिया जाएगा।
यह घटना ग्राहकों के लिए चेतावनी क्यों है?
बारकोड फ्रॉड सिर्फ स्टोर के लिए नुकसान नहीं होता—यह ग्राहकों को भी कानूनी और नैतिक दोनों स्तर पर खतरे में डाल सकता है।यह सीख देता है कि:अत्यधिक कम कीमत पर प्रोडक्ट मिलने पर सावधान रहेंबिल पर प्रोडक्ट के नाम और रेट की जांच करेंकिसी संदिग्ध गतिविधि को देखें तो रिपोर्ट करेंरिटेल सेक्टर की सुरक्षा सभी के सहयोग से ही मजबूत हो सकती है।
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