जयपुर | टोक्यो में आयोजित 25वें समर डेफलिम्पिक्स 2025 में भारत के लिए गर्व का पल आया है। जयपुर के युवा निशानेबाज़ कुशाग्र सिंह राजावत ने पुरुषों की 50 मीटर राइफल प्रोन स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज पदक अपने नाम किया। केवल 18 वर्ष की उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर कुशाग्र ने पूरे देश का नाम रोशन किया है।
कुशाग्र ने दबाव में दिखाया कमाल, 224.3 अंकों के साथ ब्रॉन्ज पर कब्जा
मानसरोवर के सुमेर नगर निवासी कुशाग्र ने फाइनल में असाधारण संतुलन, तकनीकी परिपक्वता और स्थिरता दिखाई। उन्होंने कुल 224.3 अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता में—
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यूक्रेन के दिमित्रो पेत्रेंको (251.0) ने स्वर्ण
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जर्मनी के कॉलिन म्यूलर (245.4) ने रजत जीता।
50 मीटर प्रोन स्पर्धा विश्व की सबसे कठिन शूटिंग प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है, जहां सांस, शरीर और दिमाग का पूरा तालमेल जरूरी होता है।
डेफलिम्पिक्स से पहले एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में भी चमके थे कुशाग्र
डेफलिम्पिक्स में पदक जीतने से पहले कुशाग्र ने एशियन शूटिंग चैंपियनशिप (ओपन कैटेगरी) में स्वर्ण पदक जीतकर सभी को चौंका दिया था। ओपन कैटेगरी में उनके नाम कई राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी दर्ज हैं, जो उनकी तकनीकी दक्षता और निरंतरता को दर्शाते हैं। उनके कोच का कहना है कि कुशाग्र अपने समय के सबसे प्रतिभाशाली प्रिसिजन शूटरों में से एक हैं और अपनी उम्र के खिलाड़ियों में सबसे आगे हैं।
बचपन से निशानेबाज़ी का जुनून, परिवार और कोचिंग ने बनाया अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
जयपुर में पले-बढ़े कुशाग्र बचपन से ही निशानेबाज़ी के प्रति जुनूनी रहे हैं। परिवार के सहयोग, कड़ी मेहनत, अनुशासित प्रशिक्षण और खेल के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। राजस्थान की शूटिंग कम्युनिटी उन्हें प्यार से “गोल्डन ऐम वाला लड़का” भी कहती है।
भविष्य में भारत के बड़े शूटिंग स्टार बन सकते हैं कुशाग्र
कुशाग्र के कोच का मानना है कि आने वाले वर्षों में वह भारतीय शूटिंग का बड़ा चेहरा बन सकते हैं और दुनिया की अनेक प्रतियोगिताओं में देश को और भी पदक दिला सकते हैं। उनकी प्रिसिजन, फोकस और मेच्योरिटी इस उम्र में बेहद दुर्लभ मानी जाती है।





