झालावाड़, संवाददाता: रमेश चंद्र शर्मा
खाचरोद (बकानी) ग्राम के वरिष्ठ शिक्षक, कवि एवं रचनाकार शिवलाल दांगी द्वारा रचित चालीसा संग्रह धरा से दिव्यता तक का भव्य विमोचन 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को संपन्न हुआ। यह आयोजन देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय, इंदौर के प्रतिष्ठित तक्षशिला सभागार में हुआ, जहाँ साहित्य, अध्यात्म और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
नर्मदा साहित्य मंथन और आयोजन की पृष्ठभूमि
धरा से दिव्यता तक का विमोचन विश्व संवाद केंद्र मालवा तथा पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला, देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय इंदौर द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित साहित्योत्सव नर्मदा साहित्य मंथन के मंच से किया गया। यह मंच वर्षों से साहित्यिक संवाद, चिंतन और नव सृजन का केंद्र रहा है, जहाँ देशभर के साहित्यकार अपने विचार साझा करते हैं।
कवि शिवलाल दांगी का साहित्यिक परिचय
कवि शिवलाल दांगी एक समर्पित शिक्षक होने के साथ-साथ संवेदनशील साहित्यकार भी हैं। उनकी रचनाओं में लोकसंस्कृति, भक्ति, दर्शन और मानवीय संवेदनाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। धरा से दिव्यता तक उनके साहित्यिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसमें उन्होंने चालीसा जैसी परंपरागत काव्य विधा को आधुनिक भावबोध के साथ प्रस्तुत किया है।
मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस गरिमामय समारोह के मुख्य अतिथि केरल के महामहिम राज्यपाल श्री राजेंद्र आर्लेकर रहे। विशिष्ट अतिथियों में— आचार्य मिथिलेश नंदनी जी (पीठाधीश्वर, हनुमान पीठ, अयोध्या), डॉ. विकास दवे (निदेशक, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी), प्रो. राकेश सिंघई (कुलगुरु, देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय, इंदौर), डॉ. राजेश रावल ‘सुशील’, की उपस्थिति ने धरा से दिव्यता तक के विमोचन को अत्यंत गरिमामय बना दिया।
पीठाधीश्वर मिथिलेश नंदनी का उद्बोधन
आचार्य मिथिलेश नंदनी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि धरा से दिव्यता तक में कवि शिवलाल दांगी ने देवी-देवताओं, लोक देवताओं, संतों, महापुरुषों और जीवन के विविध क्षेत्रों को अत्यंत सरल, सरस और भावपूर्ण भाषा में प्रस्तुत किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह चालीसा संग्रह समाज को नैतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से नई दिशा देगा।
मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का दृष्टिकोण
डॉ. विकास दवे ने कहा कि धरा से दिव्यता तक का प्रथम चालीसा श्री गणेश को समर्पित है। उन्होंने बताया कि प्रथम पूज्य श्री गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं तथा विघ्नों का नाश करने वाले हैं। यह संग्रह निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक चेतना का संचार करेगा।
चालीसा संग्रह की विषयवस्तु और विशेषताएं
धरा से दिव्यता तक में समाहित चालीसाएं देवी-देवताओं के साथ-साथ लोक आस्था, संत परंपरा और महापुरुषों के आदर्शों को उजागर करती हैं। डॉ. राजेश रावल ‘सुशील’ ने कहा कि यह संग्रह छांदोक्त काव्य, लय, ताल और रस से परिपूर्ण है, जिसमें मंत्र तुल्य 40 चौपाइयों की शक्ति निहित है।
चालीसा विधा का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व
चालीसा विधा भारतीय भक्ति साहित्य की एक सशक्त परंपरा रही है। धरा से दिव्यता तक इसी परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ती है। इस संग्रह को पढ़कर या सुनकर पाठक न केवल आध्यात्मिक शांति प्राप्त करता है, बल्कि जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित करता है।
कवि की आत्मानुभूति और रचना उद्देश्य
कवि शिवलाल दांगी ने कहा कि धरा से दिव्यता तक उनके लिए एक साहित्यिक कृति से अधिक एक साधना है। उन्होंने बताया कि इस संग्रह के माध्यम से उन्होंने देवी-देवताओं के साथ अनेक महापुरुषों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है, ताकि पाठक इन रचनाओं से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को नई दिशा दे सकें।
साहित्यकारों, विद्यार्थियों और श्रोताओं की भागीदारी
इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्यकार, कवि, शोधार्थी और विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। धरा से दिव्यता तक के विमोचन ने नई पीढ़ी को साहित्य और आध्यात्म से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
कार्यक्रम का संचालन, वातावरण और समापन
कार्यक्रम का संचालन पी. सी. दुबे द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, साहित्यकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया गया।
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