हरियाणा के फरीदाबाद जिले के मुस्लिम बहुल धौज गांव में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी दिल्ली ब्लास्ट के बाद जांच के घेरे में है। इस यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर कैसे पढ़े-लिखे डॉक्टर आतंकी साजिश में शामिल हो गए। बताया जा रहा है कि यह मॉड्यूल पाकिस्तान समर्थित संगठनों के इशारे पर काम कर रहा था।
हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत हुई थी स्थापना
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 1997 में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी। वर्ष 2013 में इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से NAAC ‘A’ ग्रेड की मान्यता प्राप्त हुई। 2014 में हरियाणा सरकार ने इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया। इस यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग, मेडिकल और एजुकेशन से जुड़े कई कोर्स संचालित होते हैं।
कश्मीर से जुड़े 40% डॉक्टर, जांच में नई दिशा
खुफिया सूत्रों के अनुसार, अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत लगभग 40 प्रतिशत डॉक्टर कश्मीर से हैं। यह तथ्य जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण बन गया है क्योंकि दिल्ली ब्लास्ट मामले में पकड़े गए तीन डॉक्टरों में से दो कश्मीर के रहने वाले बताए गए हैं। यह संयोग नहीं बल्कि एक संगठित साजिश का हिस्सा हो सकता है, ऐसा जांचकर्ताओं का मानना है।
यूनिवर्सिटी का प्रबंधन और ट्रस्ट
अल-फलाह यूनिवर्सिटी का संचालन अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष जावेद अहमद सिद्दीकी हैं जबकि उपाध्यक्ष मुफ्ती अब्दुल्ला कासिमी और सचिव मोहम्मद वाजिद हैं। विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. भूपिंदर कौर आनंद और रजिस्ट्रार प्रोफेसर मोहम्मद परवेज हैं।
अस्पताल और मेडिकल कॉलेज भी है शामिल
यूनिवर्सिटी परिसर में 650 बिस्तरों वाला एक अस्पताल भी मौजूद है, जहां मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जाती है। यही अस्पताल अब जांच का केंद्र बना हुआ है। पुलिस और NIA की टीमों ने यहां से कई दस्तावेज जब्त किए हैं और कई कर्मचारियों से पूछताछ की है।
दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ाव कैसे हुआ?
दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके में 12 लोगों की मौत के बाद जांच में सामने आया कि इसमें शामिल डॉक्टर अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े हुए थे। पुलवामा के डॉक्टर मोहम्मद उमर नबी यहां असिस्टेंट प्रोफेसर थे और उस कार को चलाने का संदेह उन्हीं पर है जिसमें विस्फोटक भरे थे।
जैश और अंसार गजवत-उल-हिंद से कनेक्शन
गिरफ्तार किए गए डॉक्टरों और अन्य संदिग्धों के जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद से संबंध मिले हैं। जांच एजेंसियों ने अब तक 2,900 किलोग्राम विस्फोटक जब्त किया है। एजेंसियां यह भी जांच कर रही हैं कि क्या यूनिवर्सिटी का कोई और कर्मचारी इस नेटवर्क का हिस्सा था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर उठे सवाल
तीन डॉक्टरों की गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऐसे लोगों का ठिकाना कैसे बन गई। क्या यहां भर्ती प्रक्रिया में कोई कमी रही या फिर यूनिवर्सिटी की आड़ में किसी आतंकी संगठन ने अपनी जड़ें जमा लीं — ये सब जांच के प्रमुख बिंदु हैं।
जांच जारी, एजेंसियों की पैनी नजर
फरीदाबाद, कश्मीर और दिल्ली में एक साथ चल रही छापेमारी के बाद NIA और स्थानीय पुलिस ने अल-फलाह कैंपस को पूरी तरह निगरानी में लिया है। फिलहाल एजेंसियां सभी डिजिटल रिकॉर्ड, हॉस्टल डेटा और CCTV फुटेज की जांच कर रही हैं। जल्द ही कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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