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दिल्ली में कृत्रिम बारिश की तैयारी, कानपुर से उड़ा विमान — जानिए क्लाउड सीडिंग कैसे करती है काम

दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के बाद से लगातार आठ दिनों तक वायु प्रदूषण ‘गंभीर’ श्रेणी में बना हुआ है। हवा में जहरीले कणों की मात्रा इतनी अधिक हो गई है कि आम लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। ऐसे में दिल्ली सरकार और वैज्ञानिक संस्थान अब कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) के माध्यम से प्रदूषण कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

 

कानपुर से उड़ चला विमान, दिल्ली में करेगा क्लाउड सीडिंग

मंगलवार सुबह कानपुर से एक विशेष विमान दिल्ली की ओर उड़ान भर चुका है। इसी विमान के जरिए दिल्ली के ऊपर क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया की जाएगी। हालांकि सुबह कानपुर में दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण उड़ान में थोड़ी देरी हुई। जब विजिबिलिटी 2000 मीटर से बढ़कर 5000 मीटर पहुंची, तभी विमान को उड़ान की अनुमति मिली। अब विमान दिल्ली पहुंच चुका है और बुराड़ी क्षेत्र के ऊपर क्लाउड सीडिंग का परीक्षण किया जाएगा।

 

क्लाउड सीडिंग क्या है और कैसे होती है कृत्रिम बारिश?

क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसके जरिए बादलों में विशेष रासायनिक यौगिकों का छिड़काव कर कृत्रिम रूप से बारिश कराई जाती है। इसमें सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड और पोटैशियम आयोडाइड जैसे रसायनों का उपयोग किया जाता है। ये यौगिक बादलों में जाकर जलकणों को आकर्षित करते हैं और उनके संघनन से बारिश होती है।

 

बुराड़ी क्षेत्र में होगी पहली कृत्रिम बारिश

दिल्ली में सबसे पहले बुराड़ी और खेरा क्षेत्र के ऊपर क्लाउड सीडिंग का परीक्षण किया जाएगा। पिछले सप्ताह यहां पर एक ट्रायल फ्लाइट पहले ही संचालित की जा चुकी थी, जिसमें रासायनिक यौगिकों की सीमित मात्रा छोड़ी गई थी। हालांकि उस समय वातावरण में नमी केवल 20 प्रतिशत थी, जिससे बारिश नहीं हो पाई। वैज्ञानिकों का कहना है कि कृत्रिम बारिश के लिए कम से कम 50 प्रतिशत नमी का होना जरूरी है।

 

मौसम पर निर्भर करेगी सफलता

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, आज दिल्ली और आसपास के इलाकों में बादल छाए हुए हैं। अगर नमी का स्तर 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, तो कृत्रिम बारिश की संभावना प्रबल हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वायु गुणवत्ता में तात्कालिक सुधार होगा और पीएम 2.5 तथा पीएम 10 के स्तर में कमी आएगी।

 

सरकार और वैज्ञानिकों की संयुक्त पहल

दिल्ली सरकार ने इस प्रोजेक्ट को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के वैज्ञानिकों के सहयोग से शुरू किया है। वैज्ञानिकों की टीम फिलहाल मौसम की स्थितियों की बारीकी से निगरानी कर रही है। दोपहर 1 बजे तक स्थिति का रिव्यू किया जाएगा, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि क्या आज क्लाउड सीडिंग की जाएगी या इसे अगले दिन तक टालना पड़ेगा।

 

क्लाउड सीडिंग से मिलेगी कितनी राहत?

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, क्लाउड सीडिंग से कुछ घंटों या दिनों के लिए प्रदूषण में राहत मिल सकती है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। यह केवल हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों को नीचे बैठाने का अस्थायी उपाय है। दीर्घकालिक रूप से प्रदूषण नियंत्रण के लिए उद्योगों, वाहनों और निर्माण स्थलों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना आवश्यक है।

 

जनता को राहत की उम्मीद

दिल्ली में कृत्रिम बारिश की खबर से लोगों में राहत की उम्मीद जगी है। राजधानी में कई इलाकों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 450 से ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में अगर आज कृत्रिम बारिश होती है, तो यह प्रदूषण को कुछ हद तक कम कर सकती है।

 

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच कृत्रिम बारिश का यह प्रयोग एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगर यह सफल होता है, तो आने वाले समय में प्रदूषण के गंभीर हालातों में यह तकनीक एक उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है। फिलहाल, सबकी निगाहें कानपुर से आए इस विमान और दिल्ली के मौसम पर टिकी हुई हैं।

 

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