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दो राज्यों में हार के बाद ट्रम्प का बड़ा फैसला: बीफ-कॉफी व फलों से टैरिफ हटाया, महंगाई से नाखुश जनता को राहत देने की कोशिश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को एक अहम आर्थिक कदम उठाते हुए बीफ, कॉफी, फलों, चाय, कोको और कई अन्य कृषि उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ वापस लेने का आदेश जारी किया। व्हाइट हाउस के अनुसार यह निर्णय बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण लाने और उपभोक्ताओं पर बढ़ते मूल्य दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन को लगातार यह फीडबैक मिल रहा था कि अप्रैल में लगाए गए भारी टैरिफ का सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ रहा था और खाद्य उत्पादों की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी।

 

राष्ट्रपति ट्रम्प ने बीफ, कॉफी और दूसरे वस्तुओं पर टैरिफ हटाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए ।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने बीफ, कॉफी और दूसरे वस्तुओं पर टैरिफ हटाने के कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए ।

 

चुनावी हार के बाद दबाव बढ़ा

हाल ही में वर्जीनिया और न्यू जर्सी में हुए चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इन दोनों राज्यों में डेमोक्रेट्स की जीत का बड़ा कारण महंगाई और ऊंची कीमतें बताई गईं। नतीजों के बाद ट्रम्प प्रशासन पर घरेलू आर्थिक मोर्चे पर तत्काल राहत देने का दबाव तेज हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रम्प की टीम समझ चुकी थी कि यदि महंगाई कम न की गई तो इसका असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है, इसलिए टैरिफ हटाने का फैसला जल्दबाज़ी में ही सही, लेकिन जरूरी माना गया।

 

बढ़ती कीमतों के पीछे टैरिफ को जिम्मेदार ठहराया गया

अप्रैल में ट्रम्प ने ब्राजील सहित कई देशों से आने वाले बीफ और कृषि उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाए थे। उस समय प्रशासन ने दावा किया था कि इनका घरेलू कीमतों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन कुछ ही महीनों में बीफ, कॉफी और कई जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें कई राज्यों में ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गईं। विशेषज्ञों ने ब्राजील जैसे बड़े बीफ निर्यातक देशों पर लगे शुल्क को इसका प्रमुख कारण बताया। अंततः प्रशासन को मानना पड़ा कि टैरिफ हटाए बिना कीमतें स्थिर नहीं हो सकतीं।

 

नए व्यापार समझौतों के बाद आया निर्णय

टैरिफ हटाने का यह फैसला इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, एल साल्वाडोर और अर्जेंटीना के साथ हुए नए व्यापारिक समझौतों के बाद लिया गया। इन समझौतों के तहत कृषि उत्पादों पर आयात कर में भारी कमी की गई है, जिससे इम्पोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। इस हफ्ते ट्रम्प ने संकेत दिया था कि कॉफी पर टैरिफ कम किया जा सकता है और इसके तुरंत बाद यह बड़ा आदेश जारी कर दिया गया। जानकारों का कहना है कि यह कदम चुनावी दबाव और आर्थिक रणनीति दोनों का मिश्रित परिणाम है।

 

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मेक्सिको अमेरिका का सबसे बड़ा कृषि साझेदार

वर्ष 2025 में अमेरिका का सबसे बड़ा कृषि व्यापारिक साझेदार मेक्सिको है, जिसने पिछले चार वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदे हैं। संयुक्त राज्य कृषि विभाग (USDA) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में अमेरिका ने मेक्सिको को 30.3 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद भेजे, जो 2023 की तुलना में 7% अधिक था। 2020 से 2024 के औसत व्यापार मूल्य में मेक्सिको ने 41.6 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद आयात किए, जो अमेरिका के कुल कृषि आयात का लगभग एक चौथाई है। टमाटर, एवोकाडो, बेरीज और सब्जियां मेक्सिको से आने वाले मुख्य उत्पाद हैं, जबकि अमेरिका मक्का, सोयाबीन, सूअर का मांस और डेयरी उत्पादों का प्रमुख निर्यातक है। USMCA समझौते के कारण मेक्सिको के ज्यादातर उत्पादों पर टैरिफ शून्य हैं और यही वजह है कि पिछले चार वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में 65% की वृद्धि हुई है।

 

ट्रम्प ने 100 से अधिक देशों पर टैरिफ लगाए थे

टैरिफ हटाने का यह निर्णय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी वर्ष मार्च में ट्रम्प ने संसद के संयुक्त सत्र में घोषणा की थी कि वे उन सभी देशों पर टैरिफ लगाएंगे जो अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लागू रखते हैं। इसके बाद अप्रैल में भारत सहित 69 देशों पर टैरिफ की घोषणा की गई, जिसे बाद में टाल दिया गया। जुलाई आते-आते ट्रम्प ने 100 से अधिक देशों पर नए टैरिफ लागू कर दिए और अगस्त तक यह पूर्ण रूप से प्रभावी हो चुका था। अब उन्हीं टैरिफ में कृषि क्षेत्र के लिए राहत दी जा रही है, जिससे संकेत मिलता है कि प्रशासन चुनावी परिणामों और आर्थिक दबाव को गंभीरता से ले रहा है।

 

भारत और अमेरिका के बीच डेयरी विवाद

भारत और अमेरिका के बीच डेयरी व्यापार को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी उत्पाद भारत में खुले बाजार में प्रवेश करें, लेकिन भारत इसके सख्त खिलाफ है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और यहां करोड़ों छोटे किसान डेयरी पर निर्भर हैं। भारतीय सरकार को आशंका है कि अमेरिकी डेयरी उत्पाद आने पर स्थानीय किसानों को भारी नुकसान होगा। इसके अलावा धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं भी इस विवाद को संवेदनशील बनाती हैं। अमेरिका में गायों को दिए जाने वाले फीड में जानवरों की हड्डियों से बने एंजाइम का उपयोग किया जाता है, जिसे भारत “नॉन-वेज दूध” मानता है। भारत की यह शर्त बरकरार है कि कोई भी डेयरी उत्पाद तभी भारत में बिक सकता है जब वह पूरी तरह शाकाहारी प्रक्रिया से निर्मित हो।

 

भारत की शर्त है कि कोई भी डेयरी उत्पाद तभी भारत में बिक सकता है जब वह यह साबित करे कि वह पूरी तरह शाकाहारी तरीके से बना हो।

साउथ कोरिया की कृषि सुरक्षा नीति

साउथ कोरिया भी कृषि और डेयरी उत्पादों पर अमेरिकी दबाव का सामना करता है, लेकिन उसने अपने किसानों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण प्रतिबंध लागू कर रखे हैं। कोरिया ने अपने बाजार में चावल और बीफ को पूरी तरह खोलने से इनकार कर दिया है। साथ ही 30 महीने से अधिक उम्र वाले अमेरिकी मवेशियों का बीफ आयात पर रोक है क्योंकि माना जाता है कि अधिक उम्र वाले जानवर मैड काउ बीमारी के अधिक जोखिम में होते हैं। इसके बावजूद वर्ष 2024 में कोरिया अमेरिका से 2.22 अरब डॉलर का गोमांस खरीदकर उसका सबसे बड़ा विदेशी ग्राहक बना हुआ है।

 

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स्विट्ज़रलैंड और आइसलैंड की सख्त नीतियां

स्विट्ज़रलैंड ने भी अपने डेयरी व मांस बाजार को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए बेहद ऊंचे टैक्स लगाए हैं। यहां की खेती का लगभग एक चौथाई हिस्सा डेयरी पर आधारित है और सरकार किसानों को आर्थिक सहायता देती है, ताकि वे खेती जारी रख सकें। इसी तरह आइसलैंड भी कृषि और डेयरी उत्पादों पर भारी सब्सिडी देता है और विदेशी प्रोडक्ट पर बहुत ज्यादा टैक्स लगाकर अपने बाजार को सीमित रखता है। इन देशों की नीतियां स्पष्ट करती हैं कि छोटे कृषि-प्रधान देशों में स्थानीय उत्पादन की सुरक्षा आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा है।

 

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