दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है।फांसी घर’ बयान पर शुरू हुआ विवाद अब विधानसभा के विशेषाधिकार समिति तक पहुंच गया है।इसी मामले में दिल्ली विधानसभा ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को तलब (Summon) किया है।मंगलवार को विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी नोटिस में कहा गया कि दोनों नेताओं को विशेषाधिकार समिति के सामने पेश होकर स्पष्टीकरण देना होगा।यह नोटिस उस बयान से जुड़ा है जिसे विपक्ष ने ‘असंसदीय और अपमानजनक’ बताया था।
क्या है ‘फांसी घर’ विवाद?
दरअसल, यह विवाद एक पुराने सत्र के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा है।विधानसभा की कार्यवाही के दौरान एक बहस में अरविंद केजरीवाल ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा था—यह विधानसभा कोई फांसी घर नहीं है, जहां विरोधी विचारों को खत्म कर दिया जाए।”इस बयान को लेकर विपक्षी विधायकों ने आपत्ति जताई और कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।विपक्ष ने इस टिप्पणी को हटाने और मुख्यमंत्री से माफी मांगने की मांग की थी।
विधानसभा सचिवालय का नोटिस
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी नोटिस में लिखा गया है कि मामला अब विशेषाधिकार समिति के पास है।समिति ने यह तय किया है कि दोनों नेताओं को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा।नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर कोई वैध कारण नहीं बताया गया तो यह मान लिया जाएगा कि नेता समिति के सामने पेश नहीं होना चाहते — जिसके बाद एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।
विपक्ष का आरोप और AAP की सफाई
विपक्षी दलों का कहना है कि मुख्यमंत्री और पूर्व उपमुख्यमंत्री ने असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, जो कि विधानसभा के नियमों का उल्लंघन है।भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि विधानसभा में लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखना सभी का दायित्व है।वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने सफाई दी है कि केजरीवाल का बयान रूपक के तौर पर कहा गया था, उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था का अपमान नहीं था।पार्टी ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रहा है।
विशेषाधिकार समिति क्या है?
दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति (Privilege Committee) उन मामलों की जांच करती है,जहां विधानसभा या उसके सदस्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया जाता है।अगर समिति को लगता है कि किसी सदस्य ने असंसदीय आचरण किया है, तो उसके खिलाफ चेतावनी, माफी या निलंबन की सिफारिश की जा सकती है।
आगे क्या होगा?
सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल और सिसोदिया को अगले सप्ताह समिति के सामने पेश होने का नोटिस भेजा गया है।अगर वे उपस्थित नहीं होते हैं, तो विधानसभा अध्यक्ष इस पर कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं।वहीं, आप पार्टी के भीतर भी रणनीति बनाने की कवायद शुरू हो गई है ताकि इस विवाद को जल्द सुलझाया जा सके।
राजनीतिक असर
‘फांसी घर’ विवाद अब दिल्ली की सियासत में नया मोड़ लेकर आया है।एक तरफ विपक्ष इस मुद्दे को लेकर AAP सरकार पर हमला कर रहा है,वहीं पार्टी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद आने वाले नगर निगम और विधानसभा चुनावों मेंराजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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