टोंक, संवाददाता: सुरेश भदाला
राजस्थान के प्रतिष्ठित श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (जयपुर) में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तत्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय शीतकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज भव्य समापन हुआ। ICAR प्रशिक्षण जोबनेर का उद्देश्य कृषि से जुड़े वैज्ञानिकों, अधिकारियों और शिक्षाविदों को आधुनिक कृषि ज्ञान, शोध पद्धतियों और प्रशासनिक दक्षता से जोड़ना रहा।
21 दिवसीय शीतकालीन प्रशिक्षण का उद्देश्य
ICAR प्रशिक्षण जोबनेर के अंतर्गत प्रतिभागियों को कृषि अनुसंधान, नवाचार, नीति निर्माण, पशुपालन और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य कृषि क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिकों और अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाना और उन्हें वर्तमान चुनौतियों के समाधान के लिए तैयार करना रहा। 21 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
समापन समारोह का आयोजन
ICAR प्रशिक्षण जोबनेर के समापन समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर में गरिमामय वातावरण में किया गया। इस अवसर पर राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु डॉ. त्रिभुवन शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने ऑनलाइन माध्यम से की।
मुख्य अतिथि का संबोधन
समापन समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. त्रिभुवन शर्मा ने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में कृषि की भूमिका केवल खाद्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने कहा कि ICAR प्रशिक्षण जोबनेर जैसे कार्यक्रम कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता, नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होते हैं।
कृषि और GDP पर जोर
डॉ. त्रिभुवन शर्मा ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीकों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो कृषि का GDP में योगदान कई गुना बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित वैज्ञानिक और अधिकारी कृषि विकास की गति को तेज कर सकते हैं और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित कर सकते हैं।
वैज्ञानिकों व अधिकारियों की भागीदारी
ICAR प्रशिक्षण जोबनेर में देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 70 वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया। समापन समारोह में डॉ. एसी शिवरान, डॉ. उम्मेद सिंह, डॉ. डीके गोठवाल और रोशन चौधरी सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपने कार्यक्षेत्र में नई ऊर्जा और दिशा मिली है।
प्रशिक्षण से कृषि क्षेत्र को लाभ
ICAR प्रशिक्षण जोबनेर के माध्यम से कृषि अनुसंधान और विस्तार सेवाओं को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। प्रशिक्षण प्राप्त वैज्ञानिक और अधिकारी अब किसानों तक नवीन तकनीक, उन्नत बीज और शोध आधारित समाधान बेहतर तरीके से पहुंचा सकेंगे। इससे न केवल कृषि उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा।
कृषि शिक्षा के लिए भविष्य की दिशा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। ICAR प्रशिक्षण जोबनेर कृषि शिक्षा को अधिक व्यवहारिक और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे कृषि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के बीच समन्वय भी मजबूत होगा।
श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में आयोजित ICAR प्रशिक्षण जोबनेर का सफल समापन कृषि क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश है। कृषि के GDP में योगदान बढ़ाने पर विशेषज्ञों का जोर आने वाली नीतियों और योजनाओं को नई दिशा देगा। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
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