टोंक, संवाददाता: केशव राज सैन
ईसरदा बांध डूब क्षेत्र संघर्ष समिति ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई है। समिति का कहना है कि डूब क्षेत्र से प्रभावित परिवार लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। इसी कारण Isarda Dam Protest ने फिर से जोर पकड़ लिया है।
संघर्ष समिति की पुरानी मांगें
संघर्ष समिति के अनुसार ईसरदा बांध परियोजना से प्रभावित क्षेत्रवासियों के पुनर्वास, मुआवजे और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं। समिति का दावा है कि इन मांगों को लेकर पहले भी कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
सरकार की उदासीनता पर नाराजगी
संघर्ष समिति ने बताया कि मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं। हर बार आश्वासन जरूर मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे डूब क्षेत्र के लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता गया और अब Isarda Dam Protest निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
सांकेतिक धरना और लिया गया निर्णय
सरकार की उदासीनता के विरोध में संघर्ष समिति द्वारा सांकेतिक धरना दिया गया। धरने के दौरान डूब क्षेत्र के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
6 फरवरी को NH-52 चक्का जाम का ऐलान
संघर्ष समिति ने घोषणा की है कि यदि सरकार ने जल्द मांगों पर निर्णय नहीं लिया, तो 6 फरवरी को समस्त डूब क्षेत्र के क्षेत्रवासी टोंक बाईपास स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर चक्का जाम करेंगे। समिति का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया जा रहा है, ताकि सरकार तक उनकी आवाज मजबूती से पहुंच सके।
प्रशासन को चेतावनी
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि चक्का जाम के दौरान यदि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी टोंक प्रशासन और राज्य सरकार की होगी। समिति का कहना है कि वे शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं, लेकिन अब धैर्य जवाब दे रहा है।
संघर्ष समिति अध्यक्ष का बयान
संघर्ष समिति के अध्यक्ष हंसराज फागणा ने कहा कि डूब क्षेत्र के लोग कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद जब सरकार कोई निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। उन्होंने सरकार से अपील की कि 6 फरवरी से पहले मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
आंदोलन का संभावित असर
यदि 6 फरवरी को चक्का जाम होता है, तो NH-52 पर यातायात प्रभावित होने की पूरी संभावना है। इससे प्रशासन पर दबाव बढ़ेगा और सरकार को डूब क्षेत्र की मांगों पर गंभीरता से विचार करना पड़ सकता है। ईसरदा बांध डूब क्षेत्र संघर्ष समिति ने साफ कर दिया है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। यदि सरकार समय रहते समाधान नहीं निकालती, तो 6 फरवरी को होने वाला चक्का जाम बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।
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