जयपुर। बिंदायका थाना क्षेत्र के सिंवारमोड़ इलाके में स्थित गांधी एन्क्लेव आवासीय योजना के सार्वजनिक पार्क में शव दफनाने की सूचना सामने आते ही इलाके में तनाव फैल गया। स्थानीय लोगों का कहना था कि पार्क कॉलोनीवासियों, बच्चों और बुजुर्गों के उपयोग के लिए आरक्षित है, ऐसे में वहां शव दफनाया जाना नियमों और सामाजिक मर्यादाओं दोनों के खिलाफ है।
सिंवारमोड़ और गांधी एन्क्लेव कॉलोनी का मामला
जानकारी के अनुसार गांधी एन्क्लेव कॉलोनी श्मशान के पास स्थित सार्वजनिक पार्क में शनिवार शाम शव दफनाए जाने की बात सामने आई थी। रविवार सुबह होते-होते यह खबर पूरे इलाके में फैल गई। jaipur park burial protest इसी के बाद शुरू हुआ, जब बड़ी संख्या में स्थानीय लोग पार्क के बाहर इकट्ठा हो गए और प्रशासन से जवाब मांगने लगे।
3 घंटे तक चला उग्र प्रदर्शन
देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र हो गया। विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और स्थानीय ग्रामीणों ने तीन घंटे तक लगातार विरोध-प्रदर्शन किया। jaipur park burial protest के दौरान नारेबाजी, धरना और पार्क की घेराबंदी की गई। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि शव को तुरंत हटाया जाए और पार्क को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
VHP और बजरंग दल की सक्रिय भूमिका
विवाद बढ़ने पर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने इसे आस्था और सार्वजनिक संपत्ति दोनों से जुड़ा गंभीर मामला बताया। jaipur park burial protest में इन संगठनों की मौजूदगी के बाद प्रशासन पर दबाव और बढ़ गया, जिससे हालात को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया।
4 थानों का पुलिस जाप्ता क्यों बुलाना पड़ा
स्थिति बिगड़ती देख पुलिस प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया। बिंदायका, भांकरोटा, बगरू और सेज थानों से पुलिस जाप्ता मौके पर बुलाया गया। jaipur park burial protest के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और आवाजाही नियंत्रित की गई।
JCB से पार्क की जमीन समतल कर बोर्ड लगाने का घटनाक्रम
प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल और स्थानीय लोगों ने मौके पर ही JCB मंगवाई। पार्क की जमीन को समतल करवाया गया और वहां “जय श्रीराम बालाजी पार्क” का बोर्ड लगा दिया गया। jaipur park burial protest का यह दृश्य चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि यह सीधे तौर पर सार्वजनिक जमीन के उपयोग से जुड़ा हुआ था।
स्थानीय लोगों का आक्रोश और मांग
कॉलोनीवासियों का कहना है कि यदि एक बार पार्क में शव दफनाने की परंपरा शुरू हो गई, तो आगे चलकर यह स्थान पूरी तरह अनुपयोगी हो जाएगा। jaipur park burial protest के जरिए लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि सार्वजनिक भूमि पर किसी भी तरह का गलत उपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासन और नगर निगम पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि समय रहते कार्रवाई होती, तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। jaipur park burial protest यह दिखाता है कि जयपुर जैसे बड़े शहर में भी सार्वजनिक संसाधनों की निगरानी में गंभीर खामियां हैं।
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