राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है।यह हादसा शहर के शास्त्री नगर इलाके में हुआ, जहाँ एक पुरानी इमारत की दीवार गिरने से मकान मालिक की मौत हो गई।हादसे के वक्त घर में शादी की तैयारियाँ चल रही थीं, और परिवार खुशियों के माहौल में डूबा हुआ था —लेकिन अचानक एक दीवार गिरने से सबकुछ मातम में बदल गया
हादसे की सुबह, खुशियों का घर मातम में बदल गया
जानकारी के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब मकान मालिक घर के अंदर कुछ सामान हटा रहे थे।अचानक पिछली दीवार भरभराकर गिर गई और वह मलबे के नीचे दब गए।परिवार के लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और पड़ोसियों की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया,लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।घर में अगले हफ्ते शादी तय थी — जिस जगह सजावट की योजना थी, वहाँ अब सिर्फ़ ईंटें और आँसू हैं।
निगम अधिकारियों की चुप्पी — “क्या लापरवाही रही, नहीं बता सकते”
हादसे के बाद जब नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे,तो लोगों ने सवाल उठाए कि पुरानी बिल्डिंग की जांच क्यों नहीं की गई,जबकि कई बार इलाके के लोगों ने शिकायत की थी किदीवार जर्जर हालत में है और कभी भी गिर सकती है।लेकिन जब मीडिया ने निगम अफसरों से पूछा कि “क्या ये लापरवाही थी?”तो उनका जवाब था — “अभी कुछ नहीं कह सकते, जांच चल रही है।”यह बयान अब लोगों के गुस्से को और भड़का रहा है।
इलाके में फैली दहशत, आसपास की बिल्डिंगों पर भी सवाल
दीवार गिरने के बाद आसपास के घरों में भी दरारें दिखाई दी हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इमारत लंबे समय से जर्जर थीऔर निगम को बार-बार इसकी मरम्मत या ध्वस्तीकरण के लिए सूचित किया गया था।
फिलहाल निगम ने आसपास की दो बिल्डिंगों को खाली करवाने के निर्देश दिए हैंऔर तकनीकी टीम से रिपोर्ट मांगी गई है।लेकिन स्थानीय निवासियों का कहना है — “रिपोर्ट तब आती है जब कोई मर जाता है।”
मृतक का परिवार सदमे में, शादी की जगह मातम
मृतक की पहचान रामगोपाल शर्मा (52) के रूप में हुई है।वो पेशे से छोटे व्यापारी थे और उनके परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है।परिवार की बेटी की शादी अगले हफ्ते तय थी।हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।घर के आंगन में जहां बारात की तैयारियां होनी थीं,वहां अब तंबू नहीं, बल्कि शोक सभा लगी है
निगम की जांच टीम सक्रिय, लेकिन जवाबदेही पर सवाल
नगर निगम जयपुर हैरिटेज के अधिकारियों ने हादसे की जांच शुरू कर दी है।इंजीनियरिंग विंग को यह पता लगाने का निर्देश दिया गया है किक्या बिल्डिंग संरचनात्मक रूप से कमजोर थी और क्या पूर्व अनुमति के बिना निर्माण या तोड़फोड़ की जा रही थी।हालांकि अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल यह कहना मुश्किल हैकि हादसे के पीछे निर्माण कार्य, पुरानी संरचना, या लापरवाही में से कौन सी वजह प्रमुख थी।जयपुर जैसे विकसित शहर में यह हादसा एक बार फिर नगर निगम की कार्यप्रणाली और लापरवाही पर सवाल उठाता है।जब एक परिवार की खुशियाँ मातम में बदल जाएँ और अधिकारी कहें — “क्या लापरवाही रही, नहीं बता सकते,”तो सवाल यही उठता है —क्या हर मौत के बाद ही जांच की याद आती है?जयपुर की यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की उदासीनता का सबूत है।





