जयपुर शहर के आबादी वाले इलाकों में लेपर्ड की गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं। ताजा मामला विद्याधर नगर सेक्टर 10 का है, जहाँ एक लेपर्ड ने रात के समय बछड़े का शिकार किया। घटना से इलाके में डर और बेचैनी का माहौल है। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पगमार्क (फुटप्रिंट) के आधार पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। स्थानीय निवासियों ने भी पड़े हुए फुटप्रिंट वन अधिकारियों को दिखाए और घटना की जानकारी दी।

रात में शिकार — दिन में होता तो बड़ा हादसा
स्थानीय निवासी स्वप्निल ने बताया कि संभवतः लेपर्ड ने रात के समय बछड़े को शिकार बनाया। उन्होंने कहा कि अगर यह दिन में हुआ होता तो किसी भी इंसान के साथ अनहोनी हो सकती थी। लोगों में बच्चों और बड़ों दोनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
विद्याधर नगर में पहले भी कई बार दिख चुका है लेपर्ड
विद्याधर नगर और आसपास के इलाकों में यह पहली बार नहीं है।
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जून में लेपर्ड सेक्टर 8 के घरों की छतों पर दिखा था।
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पिछले साल दिसंबर में यह सेंट्रल गवर्नमेंट गेस्ट हाउस में घुस गया था और लगभग 4 घंटे कॉलोनी में भागता रहा; बाद में वन विभाग ने उसे रेस्क्यू किया था।

पिछले हफ्ते VIP इलाके तक पहुंचा था—मंत्री के घर और स्कूल में भी दिखा
पिछले गुरुवार को लेपर्ड जयपुर के सिविल लाइंस (VIP क्षेत्र) तक पहुंच गया था। वहां इसे पूर्व केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट के घर के पास और मौजूदा मंत्री सुरेश रावत के आवास के आस-पास देखा गया; साथ ही एक स्कूल के परिसर तक भी इसकी मौजूदगी दर्ज हुई थी। उस घटना में वन विभाग की टीम ने काफी कोशिश के बाद लेपर्ड को काबू किया था।
शहर के कई हिस्सों में लगातार मूवमेंट दर्ज
पिछले कुछ महीनों में जयपुर के कई हिस्सों — सिविल लाइंस, विद्याधर नगर, दुर्गापुरा, गोपालपुरा, जयसिंहपुरा, जगतपुरा, खो-नागोरियान — में लेपर्ड देखकर सतर्कता बढ़ गई है। वन विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में शिकार (prey base) की कमी और भोजन की संकटपूर्ण स्थिति के कारण लेपर्ड आबादी क्षेत्रों की तरफ आ रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की चुनौती
लेपर्ड का हाई-सिक्योरिटी जोन और आवासीय क्षेत्रों में आना वन विभाग और पुलिस दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे बच्चों और पालतू जानवरों को शाम-रात बाहर न रखें और किसी संदिग्ध आवाज़ या फुटप्रिंट की सूचना तुरंत वन विभाग को दें।





