कोटा,संवाददाता : तेजपाल सिंह बग्गा
दशहरा मैदान में खुदाई के दौरान किशोरपुरा हनुमान जी प्रतिमा मिली है।
एक सूखे पेड़ के नीचे यह प्राचीन मूर्ति सैकड़ों साल पुरानी बताई जा रही है। प्रतिमा के मिलने के बाद लोगों का यहां तांता लग गया है।स्थानीय प्रशासन और हिंदू संगठनों की तीव्र प्रतिक्रियापूर्व पार्षद धीरेंद्र चौधरी ने बताया कि प्रतिमा 7 दिसंबर को बड़ और पीपल के संयुक्त पेड़ की खुदाई में नजर आई थी। मौके पर पहुंचकर हिंदू संगठनों ने तुरंत मंदिर निर्माण की मांग उठाई।प्रतिमा देखने के लिए भारी भीड़प्रतिमा के दर्शन के लिए आसपास के गांव और शहरों से लोग पहुंच रहे हैं। पुलिस ने सुरक्षा के लिए जाप्ता लगाया है ताकि जन आस्था को सुरक्षित रखा जा सके।
प्रतिमा का विवरण और ऐतिहासिक महत्व
मूर्ति का आकार और स्वरूपपुरातत्व विभाग के सुपरिटेंडेंट हेमंत कुमार अवस्थी के अनुसार, यह प्रतिमा वीर हनुमान के रूप में 20वीं सदी की है। मूर्ति खंडित अवस्था में थी, जिसे पुरानी पीढ़ी ने जमीन में गाड़ दिया था।हनुमान जी की विशेषताएँइस प्रतिमा में हनुमान जी हाथ में गदा लिए हैं और सिर पर मुकुट पहने हुए हैं। चेहरा वानर स्वरूप का है, जो इसे विशेष बनाता है।ऐतिहासिक संदर्भप्रतिमा का यह स्वरूप दर्शाता है कि यह स्थल पहले धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा होगा।
जन आस्था और भक्तों की प्रतिक्रिया
हिंदू संगठनों की भागीदारीविश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा के पास हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का आयोजन किया। भक्तों का उत्साह प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। लोग पूजा-अर्चना कर भगवान हनुमान में अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं। स्थानीय आयोजनों की सूची स्थानीय समाज द्वारा छोटे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह क्षेत्र अब एक नए धार्मिक केंद्र के रूप में उभरने लगा है।
सुरक्षा और प्रशासनिक कदम
पुलिस और प्रशासन की सतर्कता किशोरपुरा थाना अधिकारी भूरी सिंह ने कहा कि प्रतिमा की सुरक्षा के लिए पुलिस जाप्ता और जवानों की ड्यूटी लगाई गई है। भविष्य की योजना प्रतिमा को आगे क्या किया जाएगा, यह उच्च अधिकारियों और प्रशासन के निर्णय के बाद तय होगा। जन आस्था को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा प्रमुख प्राथमिकता है।
मंदिर निर्माण की मांग और हिंदू संगठनों की भूमिका
बजरंग दल की मांग
प्रांत संयोजक योगेश रेनवाल का कहना है कि प्रतिमा अशोक वाटिका चूड़ामणि के हाथ में गदा लिए बजरंग बली की है।
मंदिर निर्माण का सुझाव
उनकी मांग है कि जहां प्रतिमा खुदाई में निकली है, वहीं पर हनुमान जी का मंदिर बनाना चाहिए। यह स्थान जल्द ही धार्मिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है।
समुदाय और प्रशासन का दृष्टिकोण
स्थानीय प्रशासन और हिंदू संगठनों के बीच सामंजस्य से मंदिर निर्माण का प्रस्ताव आगे बढ़ सकता है। Enewsbharat.com के धार्मिक सेक्शन में ऐसे अपडेट मिलते रहते हैं।
भविष्य की संभावनाएं और निष्कर्ष
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
किशोरपुरा हनुमान जी प्रतिमा न केवल ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि स्थानीय आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी बन चुकी है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
भव्य मंदिर और नियमित पूजा आयोजन से स्थानीय अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रतिमा का मिलना और मंदिर निर्माण की मांग इस स्थल को राजस्थान के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में से एक बना सकता है।
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