कोटा, संवाददाता: तेजपाल सिंह बग्गा
Kota Canal Drowning Incident कोटा शहर के नांता थाना इलाके का बेहद दर्दनाक मामला है, जहाँ सिलिकॉन सिटी के पास नहर में डूबने से एक चरवाहे की मौत हो गई।
यह घटना शनिवार सुबह घटी जब घनश्याम बैरवा, जो अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, बकरियाँ चराते हुए नहर में गिर गया।
हादसा कैसे हुआ: नहर पर फिसलने से गई जान
शनिवार सुबह घनश्याम बैरवा छह बकरियाँ लेकर उन्हें चराने के लिए गांव से सिलिकॉन सिटी की ओर आया था।
नहर के किनारे चलते समय अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सीधे नहर में जा गिरा।
नहर में पानी का बहाव इतना तेज था कि वह संभल नहीं पाया और कुछ ही क्षणों में गहराई में चला गया।
यह हादसा इतनी जल्दी हुआ कि आसपास मौजूद लोग भी समय रहते उसे बचा नहीं पाए।
मृतक घनश्याम बैरवा कौन थे?
घनश्याम बैरवा मेहराना गांव के निवासी थे और परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति थे।
वह नियमित रूप से बकरियाँ चराकर परिवार का खर्च चलाते थे।
Kota Canal Drowning Incident ने परिवार को मानसिक, आर्थिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया है।
उनके जाने के बाद पूरा परिवार गहरे सदमे में है, क्योंकि घर की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उन्हीं पर थी।
भतीजे ने बताई घटना की पूरी जानकारी
मृतक के भतीजे राहुल बैरवा ने बताया कि सुबह 9 बजे उसे घटना की जानकारी मिली।
राहुल के अनुसार—
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चाचा घनश्याम सुबह बकरियाँ लेकर निकले
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सिलिकॉन सिटी के पास नहर किनारे पैर फिसलने से वह गिर गए
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तुरंत उन्हें बाहर निकाला गया
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लेकिन नहर में अधिक देर तक रहने के कारण उनकी हालत गंभीर हो गई
यह बयान घटना की वास्तविकता और हादसे की अचानकता को दर्शाता है।
नहर में डूबने के बाद बचाव प्रयास
जैसे ही जानकारी मिली, ग्रामीण और आसपास मौजूद लोग तुरंत नहर में उतरे और घनश्याम को बाहर निकाला।
उन्हें तुरंत एमबीएस अस्पताल ले जाया गया।
लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
Kota Canal Drowning Incident एक बार फिर चेतावनी देता है कि नहरों के किनारे फिसलन और सुरक्षा की कमी से हादसे तेजी से होते हैं।
Kota Canal Drowning Incident के बाद परिवार की हालत
घनश्याम की मौत ने परिवार को पूरी तरह असहाय कर दिया है।
वह घर के अकेले कमाने वाले थे, जिससे पूरा परिवार उन पर निर्भर था।
परिवार के सदस्यों की हालत गंभीर बताई जा रही है और गांव में मातम छाया हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार की आर्थिक सहायता और सुरक्षा उपायों की मांग की है।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम
सूचना मिलते ही नांता थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जिसके बाद उसे परिजनों को सौंपा जाएगा।
Kota Canal Drowning Incident को पुलिस एक दुर्घटना मान रही है, लेकिन सुरक्षा संबंधी लापरवाही की भी जांच की जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में नहर दुर्घटनाएँ: लगातार बढ़ती चिंता
राजस्थान के कई जिलों में नहरें खुले रूप में बहती हैं, जिनमें सुरक्षा व्यवस्था अक्सर नदारद रहती है।
नहर किनारे रेलिंग, चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा दीवारों की कमी के कारण हर साल कई हादसे होते हैं।
Kota Canal Drowning Incident एक बार फिर इस मुद्दे को उजागर करता है कि ग्रामीण और शहरी प्राधिकरणों को सुरक्षा उपाय मजबूत करने होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि नहरों के आसपास चेतावनी संकेत और सुरक्षा गश्त की जरूरत है।
Kota Canal Drowning Incident एक बेहद दर्दनाक घटना है जिसमें एक मेहनतकश चरवाहा अपनी जान गंवा बैठा।
परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है और गांव में शोक का माहौल है।
यह हादसा हमें याद दिलाता है कि नहरों और जलमार्गों के पास सुरक्षा इंतजामों की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकी जा सकें।
प्रशासन, पुलिस और स्थानीय निकायों को मिलकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी ताकि किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े।
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