कोटा, संवाददाता: तेजपाल सिंह बग्गा
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन एक बार फिर जिले में चर्चा का विषय बन गया है। नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में बपावर थाने में तैनात थानाधिकारी (SHO) ईश्वर सिंह को उनके पद से हटा दिया गया है।
बपावर थाने के SHO पर क्यों गिरी गाज
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि आरोप सीधे तौर पर गंभीर अपराध से जुड़े हैं। SHO ईश्वर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अवैध डोडा चूरा तस्करी के एक बड़े मामले में पूरी कार्रवाई नहीं की और तस्करी में शामिल अन्य आरोपियों को बचा लिया।
200 किलो डोडा चूरा तस्करी का पूरा घटनाक्रम
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन की जड़ 17 जनवरी की वह घटना है, जब बपावर थाना पुलिस ने 200 किलो अवैध डोडा चूरा के साथ एक तस्कर को पकड़ा था। यह नशीला पदार्थ हरियाणा नंबर की गाड़ी में ले जाया जा रहा था। कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन के तहत पंजाब के बसगरूर निवासी अकवाल सिंह को मौके से गिरफ्तार किया गया और वाहन सहित डोडा चूरा जब्त किया गया।
आरोपी की गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन के दौरान आरोपी अकवाल सिंह को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पहली नजर में यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही थी, लेकिन बाद में जांच के दौरान कई सवाल खड़े हो गए।
अन्य आरोपियों को बचाने का आरोप
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन तब और गंभीर हो गया, जब यह सामने आया कि इस तस्करी में अकवाल सिंह अकेला नहीं था। जांच में संकेत मिले कि बारां जिले के कुछ लोग इस नेटवर्क में शामिल थे। कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन से जुड़ी जानकारी में यह भी सामने आया कि SHO ईश्वर सिंह ने जानबूझकर अन्य आरोपियों की भूमिका को जांच में उजागर नहीं किया।
बड़े लेन-देन की आशंका क्यों
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन के पीछे एक और बड़ा कारण आर्थिक लेन-देन की आशंका है। उच्च अधिकारियों को शक है कि पूरे मामले में मोटी रकम का लेन-देन हुआ हो सकता है, जिसके चलते कुछ लोगों को बचाया गया। कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन इसी वजह से तुरंत लिया गया ताकि जांच प्रभावित न हो और सच्चाई सामने आ सके।
जांच किस अधिकारी को सौंपी गई
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन के तहत इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच रामगंज मंडी के पुलिस उप अधीक्षक घनश्याम मीणा को सौंपी गई है। उन्हें स्वतंत्र रूप से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी दोषी को संरक्षण न मिले।
तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन को लेकर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक सुजीत शंकर ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच अधिकारी तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन के बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।
पुलिस विभाग में सख्त संदेश
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन केवल एक SHO को हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पुलिस महकमे के लिए सख्त संदेश है कि नशा तस्करी जैसे मामलों में कोई ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन से आम जनता में यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
आगे क्या हो सकती है कार्रवाई
कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन के बाद अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो SHO ईश्वर सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। कोटा ग्रामीण पुलिस एक्शन आने वाले समय में नशा तस्करी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई का संकेत भी माना जा रहा है।
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