कोटा,संवाददाता:तेजपाल सिंह बग्गा
नोएडा में आयोजित वर्ल्ड कप बॉक्सिंग टूर्नामेंट में कोटा की स्टार बॉक्सर अरुंधती चौधरी ने ज़बरदस्त प्रदर्शन करते हुए फाइनल मुकाबले में उज्बेकिस्तान की खिलाड़ी को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ अरुंधती ने एक बार फिर से कोटा ही नहीं बल्कि पूरे भारत का नाम दुनिया भर में रोशन कर दिया है।अरुंधती चौधरी पहले भी यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप की विश्व विजेता रह चुकी हैं और अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सात स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।लेकिन इस बार की जीत विशेष है, क्योंकि यह उनका सीनियर वर्ग में पहला अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक है।उनके कोच अशोक गौतम के अनुसार, यह उपलब्धि अरुंधती की कड़ी मेहनत और मजबूत मानसिकता का परिणाम है, क्योंकि वह हाल ही में एक गंभीर चोट से उबरकर लौटी हैं।
गंभीर इंजरी से वापसी—कलाई और लिगामेंट फ्रैक्चर के बाद रचा कमाल
कुछ समय पहले अरुंधती को—
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हाथ की कलाई में चोट
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पैर के लिगामेंट में फ्रैक्चर
हो गया था। इस वजह से वह लगभग डेढ़ साल तक किसी भी प्रतियोगिता में भाग नहीं ले पाईं।इतने लंबे अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय फाइनल में उतरकर स्वर्ण पदक जीतना उनकी जुझारूपन, फिटनेस और आत्मविश्वास का बड़ा प्रमाण है।कोच ने बताया कि अरुंधती ने अपनी रिकवरी के दौरान कठोर ट्रेनिंग रूटीन अपनाया और वापसी को लक्ष्य बनाकर दिन-रात मेहनत की।
कोटा में जश्न—माता-पिता और जिला मुक्केबाजी संघ ने जताया गर्व
जीत की खबर जैसे ही कोटा पहुंची,
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जिला मुक्केबाजी संघ के अध्यक्ष एवं अरुंधती के पिता सुरेश चौधरी
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उनकी माता सुनीता चौधरी
ने गर्व और खुशी व्यक्त की।
परिवार ने बताया कि अरुंधती बचपन से ही खेलों के प्रति समर्पित रही हैं और जीत की यह यात्रा आसान नहीं रही।कोटा महाबली स्पोर्ट्स अकैडमी के साथ-साथ पूरे शहर में खुशी का माहौल है।सोशल मीडिया पर भी लोग “कोटा की शेरनी”, “गर्व की बात”, और “भारत की चैम्पियन” कहकर बधाइयाँ दे रहे हैं।
भारतीय सेना में हवलदार—अब 2026 एशियन गेम्स पर नज़र
फिलहाल अरुंधती भारतीय सेना में हवलदार के पद पर कार्यरत हैं।भारतीय सेना में सेवा देते हुए इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन करना उनके अनुशासन और समर्पण का प्रमाण है।जीत के बाद अरुंधती ने कहा कि उनका अगला लक्ष्यवर्ष 2026 एशियन गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाना है।उनका कहना है कि अब उनकी नज़र बड़े मंचों पर है और वह लगातार मेहनत जारी रखेंगी।अरुंधती चौधरी की यह जीत पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण है।कोटा की यह बेटी कठिन इंजरी से उबरकर न सिर्फ फाइनल तक पहुँची बल्कि देश को स्वर्ण पदक भी दिलाया।उनकी उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है और यह साबित करती है कि कठिनाइयाँ चाहे कितनी भी हों,दृढ़ संकल्प और मेहनत से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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