अंता-मांगरोल विधानसभा उपचुनाव के दौरान राजस्थान के कानून मंत्री जोगाराम पटेल और वरिष्ठ भाजपा नेता श्री चंद कृपलानी मंगलवार को मांगरोल कस्बे के प्रवास पर पहुँचे।इस दौरान ब्राह्मण समाज के कई पुजारियों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने दोनों नेताओं से मुलाकात की और मंदिर भूमि विवाद से संबंधित अपनी समस्याएँ रखीं।मांगरोल कस्बे के कई मंदिरों की भूमि लंबे समय से पुजारियों या पंडितों के नाम दर्ज नहीं है। इस वजह से इन मंदिरों की जमीन राजस्व अभिलेखों में किसी के नाम पर नहीं है, जिससे पुजारियों को भूमि संबंधी सरकारी योजनाओं और किसानों के लिए मिलने वाली सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पा रहा है।एक पंडित ने बताया —“मंदिर की भूमि का नाम दर्ज न होने से जमीन कानूनी रूप से असुरक्षित है। कई बार हमने प्रशासन को अवगत कराया, परंतु अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।”
मंदिर समिति ने कानून मंत्री को सौंपा ज्ञापन
ब्राह्मण समाज की ओर से निरंजन शर्मा, सोनू शर्मा, कार्तिक शर्मा, अनिल शर्मा, योगेश पंडित, मनीष पंडित और भाजपा नेता विष्णु गौतम सहित अन्य पंडितों ने कानून मंत्री जोगाराम पटेल को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा।यह ज्ञापन मंदिर समिति के लेटरहेड पर दिया गया, जिसमें यह मांग की गई कि मंदिरों की भूमि को आधिकारिक रूप से मंदिर ट्रस्ट या पुजारियों के नाम से जोड़ा जाए, ताकि भूमि सुरक्षित रह सके और पुजारी समाज को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
ब्राह्मण समाज ने रखी प्रमुख मांगें
बैठक के दौरान उपस्थित सभी पंडितों ने एक स्वर में कहा कि मंदिरों की भूमि का कानूनी रूप से रिकॉर्ड अपडेट होना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि यदि भूमि रिकॉर्ड में नाम जुड़ जाता है, तो पुजारियों को न केवल भूमिसंरक्षण मिलेगा बल्कि सरकार द्वारा दी जाने वाली खेती-बाड़ी की सब्सिडी, खाद और बीज योजनाओं का भी लाभ मिल सकेगा।इसके अलावा समाज ने प्रशासन से मांग की कि मंदिरों की भूमि पर अवैध कब्जों को रोका जाए और भूमि का सही उपयोग धार्मिक और सामाजिक कार्यों के लिए सुनिश्चित किया जाए।
कानून मंत्री ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने पुजारियों की शिकायत सुनने के बाद आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि यदि मंदिर भूमि से जुड़े मामलों में कोई कानूनी अड़चन है तो उसे दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।भाजपा नेता श्री चंद कृपलानी ने भी कहा कि समाज की मांगें न्यायोचित हैं और प्रशासन से इस मुद्दे पर तुरंत रिपोर्ट मांगी जाएगी।
सरकारी योजनाओं से वंचित पुजारियों का दुख
पुजारियों ने बताया कि भूमि के नामांतरण न होने की वजह से उन्हें किसान पंजीकरण, खाद वितरण, और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता।उन्होंने कहा कि मंदिर भूमि के स्वामित्व को स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि पुजारियों का जीवन-यापन भी सुरक्षित हो सके और धार्मिक संस्थानों की प्रतिष्ठा बनी रहे।मांगरोल में कानून मंत्री और श्री चंद कृपलानी के प्रवास ने स्थानीय स्तर पर मंदिर भूमि विवाद को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।अब पुजारी समाज को उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्या का स्थायी समाधान निकालेगी, ताकि मंदिर भूमि सुरक्षित हो और पुजारियों को उनका हक मिल सके।
संवाददाता_जयप्रकाश शर्मा
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