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मावली में पटेल फॉस्फोकेम फर्टिलाइजर्स इंडस्ट्रीज से बढ़ा प्रदूषण संकट, ग्रामीणों ने बंद करने की मांग की

मावली :मावली उपखंड के ग्राम खेमली में स्थित पटेल फॉस्फोकेम फर्टिलाइजर्स इंडस्ट्रीज से हो रहे रासायनिक प्रदूषण के खिलाफ ग्रामीणों ने एक बार फिर आवाज बुलंद की है। ग्रामीणों ने सोफा तहसीलदार दिनेश कुमार यादव को ज्ञापन सौंपकर फैक्ट्री को तत्काल बंद करवाने और जांच टीम गठित करने की मांग की है।ज्ञापन में बताया गया कि इस उद्योग से निकलने वाला रासायनिक धुआं, गैस और दुर्गंध गांव के लोगों के स्वास्थ्य, पेयजल, फसलों और पशुधन पर गंभीर असर डाल रहा है।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह फैक्ट्री ग्राम खेमली की आबादी और स्कूल से मात्र 300 से 700 मीटर की दूरी पर संचालित हो रही है, जो पर्यावरण सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है।फैक्ट्री से निकलने वाले रासायनिक धुएं के कारण लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में कठिनाई, सिर दर्द और त्वचा संबंधी बीमारियां हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति पिछले 18 से 20 महीनों से लगातार बनी हुई है, बावजूद इसके प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

 

स्कूल के बच्चे भी हो रहे प्रभावित

ज्ञापन में बताया गया कि फैक्ट्री के आसपास दो विद्यालय स्थित हैं, जिनमें 2000 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं।ये बच्चे प्रतिदिन रासायनिक प्रदूषण की चपेट में आ रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।ग्रामीणों ने चिंता जताई कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।

 

कृषि और पशुधन पर भी असर

खेमली और जूनावास क्षेत्र के किसानों का कहना है कि फसलों की पैदावार में भारी गिरावट आई है।फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं और रसायनों के कारण मिट्टी की उर्वरक क्षमता घट रही है और पशुधन भी बीमार पड़ रहा है।ग्रामीणों ने मांग की कि सरकार कृषि हानि और स्वास्थ्य क्षति का आकलन कराए और प्रभावित परिवारों को मुआवजा प्रदान करे।

 

जांच और कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि ग्राम पंचायत खेमली ने जांच के बाद फैक्ट्री की स्वीकृति रद्द कर दी थी, फिर भी उद्योग अवैध रूप से चालू है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि:

फैक्ट्री की पर्यावरण स्वीकृति, प्रदूषण नियंत्रण अनुमति और जल उपयोग स्वीकृति की जांच की जाए।

जांच पूरी होने तक फैक्ट्री संचालन पर रोक लगाई जाए।

प्रभावित ग्रामीणों के लिए मेडिकल कैंप आयोजित किया जाए।

प्रदूषण से हुए नुकसान की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए।

 

ग्रामीणों की चेतावनी

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे सामूहिक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि अब यह मुद्दा केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि जनजीवन और भविष्य की पीढ़ी के स्वास्थ्य का है।ज्ञापन सौंपने के दौरान जमनालाल डांगी, महेश डांगी, खेमराज डांगी, मोहन डांगी, कैलाश मेघवाल, रामलाल गमेती, पुष्कर पुरबिया, चेतन गायरी, नारायण लाल डांगी सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।मावली के ग्रामीणों की यह लड़ाई सिर्फ एक फैक्ट्री के खिलाफ नहीं, बल्कि स्वच्छ वातावरण और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए है।यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, तो यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए यह आवश्यक है कि वे फैक्ट्री की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच करें और ग्रामीणों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

 

संवाददाता_आजाद मुल्तानी

 

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