महाराष्ट्र के सातारा जिले में महिला डॉक्टर की आत्महत्या केस में पुलिस ने पहली गिरफ्तारी की है। फलटन के होटल में आत्महत्या करने वाली डॉक्टर के मकान मालिक के बेटे प्रशांत बांकर को हिरासत में लिया गया है। प्रशांत पर रेप और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज हुआ है।
चार पन्नों के सुसाइड नोट में चौंकाने वाले खुलासे
पुलिस को डॉक्टर के कमरे से 4 पेज का सुसाइड नोट मिला है। इसमें एक सांसद और उनके दो पर्सनल असिस्टेंट (PA) के नाम हैं। डॉक्टर ने लिखा कि इन लोगों ने उस पर फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने का दबाव डाला था। मना करने पर सांसद ने खुद फोन कर धमकी दी थी।
हथेली पर लिखा था आरोपी का नाम
डॉक्टर ने आत्महत्या से पहले अपने हाथ पर सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदने का नाम लिखा था। उसने आरोप लगाया था कि बदने ने पिछले 5 महीनों में चार बार रेप किया और आरोपियों के लिए फर्जी रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया। इस केस के बाद CM फडणवीस ने आदेश देकर गोपाल बदने को सस्पेंड कर दिया है।
परिवार ने उठाए गंभीर आरोप
मृतक डॉक्टर के परिजनों ने कहा कि उस पर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल रिपोर्ट बदलने का दबाव डाला जा रहा था। डॉक्टर के चचेरे भाई ने बताया कि उसने पहले ही सतारा एसपी और डीएसपी को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसने अपने लेटर में लिखा था कि अगर उसके साथ कुछ होता है तो जिम्मेदारी कौन लेगा।
होटल स्टाफ ने खोला दरवाजा, मिला शव
सातारा SP ने बताया कि डॉक्टर ने फलटन के एक होटल में कमरा लिया था। जब स्टाफ ने दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दूसरी चाबी से दरवाजा खोला गया, जहां डॉक्टर फांसी पर लटकी मिली। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और जांच शुरू कर दी है।
राजनीतिक हलचल और नेताओं की प्रतिक्रियाएं
इस घटना ने पूरे राज्य की राजनीति को हिला दिया है।
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कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि राज्य की कानून व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ चुकी है।
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महिला आयोग प्रमुख रूपाली चाकनकर ने पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
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मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि जांच निष्पक्ष और फोरेंसिक आधार पर होनी चाहिए।
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शिवसेना (UBT) की सुषमा अंधारे ने स्वतंत्र SIT जांच की मांग की।
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भाजपा नेता चित्रा वाघ ने महिलाओं से 112 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत दर्ज करने की अपील की।
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कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि जब डॉक्टर ने पहले शिकायत की थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
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NCP नेता आनंद परांजपे ने कहा कि यह केस फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए।
महिला सुरक्षा और न्याय की मांग
यह केस सिर्फ एक डॉक्टर की मौत नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा और सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है। अब पूरा राज्य इस बात की प्रतीक्षा कर रहा है कि SIT जांच के बाद कितनी सख्त कार्रवाई होती है और क्या न्याय मिल पाएगा।





