सवाई माधोपुर, संवाददाता: बृजेश त्रिवेदी
मनोचिकित्सा कार्यशाला का आयोजन छात्रों और शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से किया गया। आज के समय में बढ़ते मानसिक तनाव, चिंता और नशे की प्रवृत्ति को देखते हुए ऐसे कार्यक्रमों की आवश्यकता और भी बढ़ गई है। इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों को मानसिक रोगों की पहचान, उनके उपचार और बचाव के तरीकों से अवगत कराना रहा।
मॉडल स्कूल खंडार में आयोजन
सवाई माधोपुर जिले के खंडार स्थित स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में मनोचिकित्सा कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सामान्य चिकित्सालय के मनोचिकित्सक डॉक्टर गौरव चंद्रवंशी द्वारा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक शामिल हुए।
छात्रों को मानसिक रोगों की जानकारी
मनोचिकित्सा कार्यशाला के दौरान डॉक्टर गौरव चंद्रवंशी ने एक घंटे से अधिक समय तक चले सत्र में बच्चों को विभिन्न मानसिक रोगों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मिर्गी, हिस्टीरिया, माइग्रेन, ओसीडी, जीएडी, पैनिक डिसऑर्डर और एंग्जाइटी जैसे मनोविकारों को सरल भाषा में समझाया।
एंग्जाइटी और फोबिया पर विशेष सत्र
कार्यशाला में एंग्जाइटी और विभिन्न प्रकार के फोबिया पर विशेष रूप से चर्चा की गई। डॉक्टर चंद्रवंशी ने बताया कि डर, घबराहट और तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते पहचानना और उपचार कराना आवश्यक है। मनोचिकित्सा कार्यशाला के माध्यम से छात्रों को यह समझाया गया कि मानसिक रोग भी अन्य बीमारियों की तरह सामान्य होते हैं और उनका इलाज संभव है।
नशे के दुष्प्रभावों पर जागरूकता
मनोचिकित्सा कार्यशाला में नशे के विषय पर भी विशेष सत्र रखा गया। डॉक्टर चंद्रवंशी ने विभिन्न प्रकार के नशों, उनके शारीरिक और मानसिक दुष्प्रभावों तथा नशा छोड़ने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नशा न केवल शरीर को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पढ़ाई, परिवार और समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
नशा मुक्ति की सामूहिक प्रतिज्ञा
कार्यशाला के अंत में सभी छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को नशा नहीं करने की प्रतिज्ञा दिलाई गई। इसके साथ ही यह भी संकल्प कराया गया कि वे अपने आसपास के लोगों को भी नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करेंगे और उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करेंगे। यह पहल मनोचिकित्सा कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। डॉक्टर गौरव चंद्रवंशी ने छात्रों को मानसिक रोगों, एंग्जाइटी और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया।
शिक्षकों और छात्रों की सहभागिता
मनोचिकित्सा कार्यशाला में विद्यालय के शिक्षकों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। शिक्षकों ने छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और किसी भी समस्या को छिपाने के बजाय साझा करने के लिए प्रेरित किया। छात्रों ने भी कार्यशाला में रुचि दिखाते हुए प्रश्न पूछे और अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं।
मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक संदेश
मनोचिकित्सा कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। समय-समय पर ऐसे जागरूकता कार्यक्रम छात्रों को आत्मविश्वासी, स्वस्थ और सकारात्मक जीवन की ओर प्रेरित करते हैं।
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