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NEET छात्र ने की आत्महत्या: ‘अम्मा-अब्बू माफ कर देना… मैं थक गया हूं’

कोटा

 

राजस्थान के कोटा से एक और दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) की तैयारी कर रहे एक छात्र ने आत्महत्या कर ली।
छात्र के कमरे से दो पन्नों का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा —अम्मा-अब्बू, मुझे माफ कर देना… मैं अपनी जिंदगी से थक चुका हूं।”यह शब्द पूरे परिवार और समाज को झकझोर देने वाले हैं।

 

दो पन्नों का सुसाइड नोट मिला

 

पुलिस के मुताबिक, मृतक छात्र की उम्र 18 साल थी और वह कोटा के एक प्रमुख कोचिंग संस्थान में NEET 2026 की तैयारी कर रहा था।उसके दोस्तों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह चुप रहता था और किसी से ज्यादा बात नहीं करता था।शनिवार सुबह जब उसने कमरे का दरवाजा नहीं खोला, तो साथियों ने हॉस्टल प्रशासन को सूचना दी।दरवाजा तोड़कर देखा गया तो छात्र पंखे से लटका हुआ मिला। मौके से दो पन्नों का सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें उसने अपनी असफलताओं और मानसिक दबाव का जिक्र किया है।

 

नोट में क्या लिखा था?

 

पुलिस के मुताबिक, सुसाइड नोट में छात्र ने लिखा —मैंने बहुत कोशिश की लेकिन अब मुझसे नहीं हो पा रहा। अम्मा-अब्बू, आपने मुझे बहुत कुछ दिया, लेकिन मैं आपको गर्व महसूस नहीं करा सका। मैं अब इस दर्द को और नहीं झेल सकता।”इन शब्दों ने हर उस माता-पिता का दिल तोड़ दिया, जो अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए कोटा भेजते हैं।

 

कोटा में बढ़ती आत्महत्याएं फिर सवालों के घेरे में

 

कोटा, जो कभी ‘शिक्षा की राजधानी’ कहा जाता था, अब ‘आत्महत्याओं का शहर’ बनता जा रहा है।साल 2025 में अब तक 40 से ज्यादा छात्रों ने आत्महत्या की है।मानसिक दबाव, प्रतियोगी परीक्षा का प्रेशर और अकेलापन — ये सभी वजहें छात्रों की जिंदगी छीन रही हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ‘फेल होने के डर’ ने छात्रों को अंदर से तोड़ दिया है।मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देना इस स्थिति को और खराब कर रहा है।

 

पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच

 

पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिवार को सूचित कर दिया गया है।प्रशासन ने कोचिंग संस्थान से जवाब मांगा है कि क्या छात्र किसी तरह के शैक्षणिक दबाव में था।कोटा जिला प्रशासन ने पहले भी छात्रों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए ‘Happy Room Campaign’ और काउंसलिंग ड्राइव जैसे कई प्रयास किए हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अभी भी गंभीर है।

 

मनोचिकित्सकों ने दी सलाह

 

मनोचिकित्सकों का कहना है कि माता-पिता को अपने बच्चों से केवल पढ़ाई या रैंक की बात नहीं करनी चाहिए।उन्हें यह एहसास दिलाना चाहिए कि “असफलता अंत नहीं है” और जीवन सबसे महत्वपूर्ण है।हर छात्र को यह समझना चाहिए कि एक परीक्षा उसकी पूरी जिंदगी तय नहीं करती,”कहते हैं डॉ. विनोद शर्मा, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ।

 

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