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pad yatra bhandara: मांगरोल मार्ग पर चौथ माता पदयात्रियों के लिए प्रथम भंडारा, 24 घंटे भोजन व विश्राम की व्यवस्था

बारां, संवाददाता: जय प्रकाश शर्मा 

 

राजस्थान में चौथ माता के दर्शन के लिए निकलने वाली पदयात्रा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की परंपरा का भी प्रतीक है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए चौथ बरवाड़ा पहुंचते हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष pad yatra bhandara का आयोजन मांगरोल क्षेत्र में किया गया है। पदयात्रियों की सेवा को धर्म का सबसे बड़ा रूप माना जाता है, और यही भावना इस भंडारे के पीछे दिखाई देती है।

 

मांगरोल मार्ग पर प्रथम भंडारे की शुरुआत

बारां–मांगरोल मार्ग पर कुंड के समीप एक ढाबे के पास खाली भूमि पर टेंट लगाकर pad yatra bhandara का प्रथम आयोजन किया गया। यह भंडारा विशेष रूप से चौथ बरवाड़ा माता के दर्शन के लिए जा रहे पदयात्रियों को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया है, जिससे उन्हें रास्ते में भोजन और विश्राम की सुविधा मिल सके।

 

बंमूलिया जागीर और मियाडा गांव का योगदान

इस pad yatra bhandara का आयोजन बंमूलिया जागीर और मियाडा गांव के सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा सामूहिक रूप से किया जा रहा है। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और सेवा भावना के साथ इस आयोजन को सफल बनाने का संकल्प लिया है, जो ग्रामीण समाज की एकता को दर्शाता है।

 

24 घंटे भोजन और विश्राम की व्यवस्था

भंडारे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां पदयात्रियों के लिए 24 घंटे भोजन, नाश्ता, चाय और विश्राम की व्यवस्था की गई है। pad yatra bhandara में दिन-रात सेवा जारी रहती है, ताकि किसी भी समय आने वाले पदयात्री को असुविधा न हो।

 

चौथ माता पदयात्रियों को मिल रही राहत

चौथ बरवाड़ा जाने वाले पदयात्री इस pad yatra bhandara का लाभ लेकर काफी राहत महसूस कर रहे हैं। लंबी दूरी तय करने के बाद यहां भोजन और विश्राम मिलने से पदयात्रियों को आगे की यात्रा के लिए नई ऊर्जा मिल रही है।

 

सेवा भावना और सामाजिक एकता

भंडारे से जुड़े छीतर सुमन मंडावरा, नरेश मीणा, शोभाग मीणा, सत्यनारायण सुमन, दीपक सैन, बद्रीलाल नागर और मेघराज नागर ने बताया कि यह आयोजन पूरी तरह सेवा भावना से प्रेरित है। pad yatra bhandara समाज में आपसी सहयोग, त्याग और समर्पण का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है।

 

पदयात्रियों की प्रतिक्रिया

भंडारे का लाभ ले रहे पदयात्रियों ने आयोजकों की सराहना की और कहा कि इस तरह की व्यवस्थाएं यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाती हैं। कई पदयात्रियों ने कहा कि pad yatra bhandara जैसे आयोजन धार्मिक यात्राओं की आत्मा होते हैं।

 

भंडारा कब तक चलेगा

आयोजकों के अनुसार यह pad yatra bhandara 4 जनवरी तक निरंतर चलेगा। प्रतिदिन बड़ी संख्या में पदयात्री यहां पहुंचकर भोजन, नाश्ता, चाय और विश्राम की सुविधा ले रहे हैं।

 

आस्था और सेवा का सुंदर संगम

कुल मिलाकर, मांगरोल मार्ग पर आयोजित pad yatra bhandara आस्था और मानव सेवा का सुंदर संगम है। यह आयोजन न केवल पदयात्रियों को सुविधा प्रदान कर रहा है, बल्कि समाज को सेवा और सहयोग का संदेश भी दे रहा है। 

 

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