टोंक, संवाददाता: कमलेश प्रजापत
पंवालिया ग्राम पंचायत क्षेत्र में डामरीकरण सड़क योजना के तहत चल रहे सड़क निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही सामने आई है। टोडा–मालपुरा मार्ग पर गुर्जर की थड़ी से ग्राम पंचायत पंवालिया तक सड़क निर्माण के दौरान चौंकाने वाली स्थिति देखने को मिली। स्थानीय निवासियों और ई न्यूज़ भारत मीडिया टीम की जांच के अनुसार, सड़क निर्माण के दौरान न तो सड़क निर्माण का पट लगाया गया और न ही दिशा-सूचक बोर्ड, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों के लिए गंभीर परेशानी पैदा हुई। सड़क निर्माण के दौरान बनी इस लापरवाही की स्थिति से न केवल यातायात प्रभावित हुआ, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी असुविधा हुई।
पर्यावरण और पेड़ों को हुआ नुकसान
ठेकेदार ने खजूर, देसी बबूल सहित कई कीमती हरे पेड़ों को जड़ों से उखाड़कर सड़क पर बैरिकेडिंग के रूप में इस्तेमाल किया। इस कार्य से स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचा। पेड़ों की कटाई ने क्षेत्र में हरियाली कम कर दी और प्राकृतिक संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बिना अनुमति के पेड़ों को काटा गया, जो कि पर्यावरण संरक्षण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। राज्य सरकार “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, लेकिन जमीन पर जिम्मेदार विभागों की अनदेखी से इस दिशा में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन
सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार ने सरकारी दिशा-निर्देशों की खुलेआम अवहेलना की। न तो दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए और न ही सड़क निर्माण के लिए निर्धारित मानक अपनाए गए। हरे पेड़ों को काटकर सड़क पर बैरिकेडिंग के रूप में इस्तेमाल करना पर्यावरण और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से गंभीर उल्लंघन है। यह घटना न केवल सड़क निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सरकारी नियमों की गंभीर अनदेखी को भी उजागर करती है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय लोग इस लापरवाही से नाराज हैं और मांग कर रहे हैं कि संबंधित विभाग तुरंत कार्रवाई करे। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की प्रक्रिया में पर्यावरण और सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। स्थानीय निवासियों का यह भी आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता के कारण हरे पेड़ों की कटाई और नियमों का उल्लंघन हो रहा है। स्थानीय लोगों ने ठेकेदार और जिम्मेदार विभागों से मांग की है कि नुकसान हुए पेड़ों की जगह नए पेड़ लगाए जाएं और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए नियम कड़ाई से लागू किए जाएं।
पर्यावरण और प्रशासन पर सवाल
पंवालिया सड़क निर्माण लापरवाही ने न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन और ठेकेदार की जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की मांग है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो और सड़क निर्माण कार्य पर्यावरण और सुरक्षा दोनों मानकों का पालन करते हुए किया जाए।
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