एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री के दिग्गज और पद्मश्री से सम्मानित पीयूष पांडे का 70 साल की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। उनके निधन की खबर ने मीडिया और विज्ञापन जगत में शोक की लहर दौड़ा दी। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी X पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि पीयूष पांडे ने विज्ञापन की दुनिया में अपनी अद्भुत क्रिएटिविटी के जरिए अमिट छाप छोड़ी।
विज्ञापन जगत में करियर की शुरुआत
पीयूष पांडे ने 27 साल की उम्र में विज्ञापन की दुनिया में कदम रखा। अपने भाई प्रसून पांडे के साथ उन्होंने रेडियो जिंगल्स की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई। 1982 में वे ओगिल्वी में जुड़े और 1994 में उन्हें ओगिल्वी के बोर्ड में नॉमिनेट किया गया।
पीयूष पांडे के प्रसिद्ध विज्ञापन कैंपेन
फेविकॉल का “ट्रक वाला विज्ञापन”
साल 2007 में आया यह विज्ञापन, एक साधारण गोंद को हर घर में फेमस बनाने वाला साबित हुआ। ट्रक पर बैठे लोग ऊबड़-खाबड़ सड़क पर गिरते नहीं और गाड़ी चलती रहती है। इस विज्ञापन ने फेविकॉल को घर-घर में पहचान दिलाई और कई अवॉर्ड भी जीते।
कैडबरी का “क्रिकेट वाला विज्ञापन”
2007 में आए इस विज्ञापन में क्रिकेट के प्रति लोगों का प्यार दिखाया गया। बच्चे के छक्का मारते ही मोहल्ला नाचने लगता है। “कुछ खास है जिंदगी में!” की लाइन लोगों को सीधे जोड़ती है और इसने ब्रांड की लोकप्रियता बढ़ाई।
एशियन पेंट्स का “हर घर कुछ कहता है”
2002 में आए इस एड में परिवार की यादों को दीवारों पर जीवित दिखाया गया। “हर घर कुछ कहता है” टैगलाइन ने लोगों के दिलों को छू लिया और एशियन पेंट्स को मार्केट लीडर बनाया।
वोडाफोन का “पग वाला विज्ञापन”
2003 में आए इस विज्ञापन में बच्चे का प्यारा पग मोबाइल कनेक्टिविटी और दोस्ती का प्रतीक बन गया। “भाई, हच है ना!” जैसे डायलॉग्स ने इसे घर-घर फेमस किया।
भाजपा का “अबकी बार मोदी सरकार”
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए पीयूष पांडे ने “अबकी बार मोदी सरकार” कैंपेन डिज़ाइन किया। 50 दिन में उन्होंने 200+ टीवी एड, 100+ रेडियो एड और 100+ प्रिंट एड तैयार किए। इस कैम्पेन ने मोदी की छवि और संदेश को जनता तक सरल और प्रभावशाली ढंग से पहुंचाया।
पल्स पोलियो का “दो बूंदें जिंदगी की”
यह सामाजिक संदेश आधारित एड भी पीयूष पांडे ने तैयार किया। यह कैंपेन आज भी लोगों की यादों में जीवित है और स्वास्थ्य संदेश को सरल भाषा में पहुंचाता है।
सम्मान और अवार्ड
पीयूष पांडे को 2016 में भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके अलावा, 2024 में उन्हें LIA लीजेंड अवार्ड भी मिला। वे दैनिक भास्कर के बोर्ड में 10 साल तक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर रहे।
समापन
पीयूष पांडे ने विज्ञापन की दुनिया में कई क्रांतिकारी और यादगार काम किए। उनके द्वारा बनाई गई टैगलाइन और एड्स आज भी लोगों की जुबान पर हैं। उनके निधन से न केवल विज्ञापन जगत, बल्कि पूरे समाज को एक महान क्रिएटिव माइंड खो दिया।





