अलवर, संवाददाता: मुकेश कुमार शर्मा
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) योजना का मुख्य लक्ष्य किसानों को सस्ती, स्वच्छ और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराना है। इस योजना से किसान न केवल अपने खेतों की सिंचाई कर पाते हैं बल्कि अतिरिक्त सौर ऊर्जा बेचकर आय भी बढ़ा सकते हैं। यह योजना बिजली वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है।
खैरथल-तिजारा जिले में योजना की उपलब्धियां
जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) के किशनगढ़बास डिवीजन में घटक ‘ए’ और ‘सी’ का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। घटक ‘ए’ के तहत अब तक 8 मेगावाट क्षमता के विकेंद्रीकृत ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित/आवंटित किए गए हैं। घटक ‘सी’ के अंतर्गत 30.39 मेगावाट क्षमता की कृषि पंपों की सोलराइजेशन की गई है। यह उपलब्धि जिले में नवीकरणीय ऊर्जा के प्रसार और किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।
घटक ‘ए’ के अंतर्गत छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र
घटक ‘ए’ के तहत 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता वाले छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र किसानों या अन्य उपयुक्त भूमि पर स्थापित किए जाते हैं। इन संयंत्रों से उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजी जाती है और डिस्कॉम द्वारा निर्धारित दरों पर खरीदी जाती है। इससे किसानों और भूमि स्वामियों को दीर्घकालीन और स्थिर आय का स्रोत मिलता है।
घटक ‘सी’ के अंतर्गत कृषि पंप सोलराइजेशन
PM-KUSUM Scheme Progress ने सौर सिंचाई से किसानों की बिजली लागत घटाई। घटक ‘सी’ के तहत पहले से ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा गया है। किसान दिन के समय सौर ऊर्जा से सिंचाई कर रहे हैं, जिससे बिजली कटौती की समस्या समाप्त हुई। अतिरिक्त सौर ऊर्जा को ग्रिड में भेजकर किसान अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।
किसानों के लिए दोहरा लाभ
सौर ऊर्जा से सिंचाई करने पर किसान अपनी बिजली लागत बचाते हैं और अतिरिक्त ऊर्जा बेचकर आय बढ़ाते हैं। इससे कृषि क्षेत्र में स्थायित्व आया है और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
आवेदन प्रक्रिया और स्वीकृति
PM-KUSUM Scheme Progress में आवेदन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी। योजना का लाभ लेने वाले किसान राज्य नोडल एजेंसी (SNA) या पीएम-कुसुम की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की जांच और सत्यापन के बाद ही स्वीकृति प्रदान की जाती है।
तकनीकी और व्यवहार्यता अध्ययन
घटक ‘ए’ के लिए भूमि स्वामित्व और घटक ‘सी’ के लिए कृषि पंपों का सत्यापन किया जाता है। इसके बाद डिस्कॉम द्वारा तकनीकी और व्यवहार्यता अध्ययन संपन्न किया जाता है।
प्रणाली की स्थापना और कमीशनिंग
स्वीकृति मिलने के बाद अनुमोदित विक्रेता द्वारा सौर ऊर्जा संयंत्र या सोलर पैनल स्थापित किया जाता है। स्थापना पूर्ण होने के बाद प्रणाली का परीक्षण और कमीशनिंग होती है। इसके साथ ही अतिरिक्त ऊर्जा का ग्रिड में निर्यात शुरू होता है।
योजना का भविष्य और जिले में प्रभाव
PM-KUSUM Scheme Progress से जिले में टिकाऊ ऊर्जा और किसान सशक्तिकरण। इस योजना से ग्रामीण विद्युत ढांचा मजबूत हुआ है। कृषि उत्पादकता बढ़ी है और स्वच्छ ऊर्जा का प्रसार हुआ है। आने वाले समय में योजना के विस्तार से किसानों की आय में और वृद्धि होगी और जिले में नवीकरणीय ऊर्जा की स्थिरता बढ़ेगी। घटक ‘ए’ और ‘सी’ के सफल क्रियान्वयन से जिले में सौर ऊर्जा का व्यापक प्रसार हुआ है। यह योजना किसानों के आर्थिक हित, पर्यावरण संरक्षण और कृषि क्षेत्र की स्थायित्वता में एक बड़ी सफलता साबित हो रही है।
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