जोधपुर, संवाददाता: कपिल सांखला
जोधपुर स्थित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के संजीवनी आयुर्वेद चिकित्सालय में एक ऐतिहासिक पहल के तहत prp therapy ayurveda यूनिट का शुभारंभ किया गया। यह यूनिट कुलगुरु प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ल के करकमलों द्वारा उद्घाटित की गई। यह यूनिट पीजी विभाग अगदतंत्र के अंतर्गत संचालित होगी, जिससे रोगियों को आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित आधुनिक उपचार सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का संगम
prp therapy ayurveda यूनिट का शुभारंभ आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के सशक्त समन्वय का उदाहरण है। कुलगुरु ने इसे विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह पहल पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।
कुलगुरु प्रो. गोविंद सहाय शुक्ल का दृष्टिकोण
उद्घाटन समारोह में बोलते हुए कुलगुरु प्रो. गोविंद सहाय शुक्ल ने कहा कि prp therapy ayurveda दरअसल आयुर्वेद में वर्णित “प्रच्छान कर्म” का आधुनिक वैज्ञानिक स्वरूप है। उन्होंने बताया कि इस थेरेपी में रोगी के स्वयं के रक्त से प्राप्त प्लेटलेट्स को संकेंद्रित कर उपचार किया जाता है, जिससे शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता सक्रिय होती है।
प्रच्छान कर्म का आधुनिक वैज्ञानिक स्वरूप
आयुर्वेद में वर्णित प्रच्छान कर्म को अब prp therapy ayurveda के रूप में वैज्ञानिक तकनीक से और अधिक प्रभावी बनाया गया है। इसमें किसी बाहरी रसायन का उपयोग नहीं होता, जिससे यह पद्धति सुरक्षित, प्राकृतिक और दीर्घकालिक लाभ देने वाली मानी जा रही है।
बाल झड़ने के उपचार में नई उम्मीद
कुलगुरु ने बताया कि prp therapy ayurveda विशेष रूप से बाल झड़ने (खालित्य) की समस्या में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है। यह थेरेपी बालों की जड़ों को मजबूत करने के साथ-साथ स्कैल्प में रक्तसंचार सुधार कर प्राकृतिक हेयर ग्रोथ को प्रोत्साहित करती है।
PRP थेरेपी कैसे करती है काम
prp therapy ayurveda में रोगी के ही प्लेटलेट्स का उपयोग कर टिश्यू रिजनरेशन को बढ़ावा दिया जाता है। यह प्रक्रिया शरीर की स्वाभाविक पुनरुत्पादन शक्ति को सक्रिय कर उपचार को तेज और प्रभावी बनाती है।
पहले ही दिन सफल उपचार
PRP यूनिट प्रभारी प्रोफेसर रितु कपूर ने जानकारी दी कि prp therapy ayurveda यूनिट के शुभारंभ के पहले ही दिन 10 रोगियों की सफलतापूर्वक थेरेपी की गई। यह इस यूनिट की उपयोगिता और प्रभावशीलता का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है।
शोध और क्लिनिकल स्टडी की योजना
प्रोफेसर रितु कपूर ने बताया कि आने वाले समय में prp therapy ayurveda यूनिट में शोधपरक कार्य और क्लिनिकल स्टडीज़ भी प्रारंभ की जाएंगी। इससे आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों को वैज्ञानिक प्रमाण और नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्टजन
इस अवसर पर पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद के प्राचार्य प्रोफेसर चंदन सिंह, हॉस्पिटल अधीक्षक प्रोफेसर गोविंद गुप्ता, उपकुलसचिव डॉ. मनोज कुमार अदलखा, पीएचडी डीन प्रोफेसर देवेंद्र सिंह चाहर सहित अनेक वरिष्ठ चिकित्सक और स्नातकोत्तर विद्यार्थी उपस्थित रहे। सभी ने prp therapy ayurveda यूनिट को आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में मील का पत्थर बताया।
आयुर्वेद को मिली नई दिशा
कुल मिलाकर, prp therapy ayurveda यूनिट का शुभारंभ आयुर्वेदिक चिकित्सा को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने की एक मजबूत पहल है। यह यूनिट न केवल बाल झड़ने के उपचार में नई उम्मीद बनेगी, बल्कि आयुर्वेदिक शोध और रोगी कल्याण के क्षेत्र में भी नई दिशा तय करेगी।
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