नई दिल्ली | रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत में दो दिवसीय दौरे पर आएंगे। यह उनकी यूक्रेन युद्ध के बाद पहली भारत यात्रा होगी। पुतिन 23वीं भारत-रूस समिट में हिस्सा लेंगे, जो दोनों देशों के बीच वार्षिक बैठक का हिस्सा है। इस बार समिट की मेजबानी भारत कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात और चर्चा के मुद्दे
समिट के दौरान पुतिन पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। संभावित चर्चाओं में रूसी क्रूड ऑयल की डील, S-400 मिसाइल सिस्टम खरीद और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) शामिल हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुतिन के सम्मान में स्टेट डिनर देंगी। रूस से तेल खरीदने के कारण अमेरिका ने भारत के कुछ निर्यात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगा रखा है, जिससे भारत लगभग 50% टैरिफ का प्रभाव झेल रहा है।
डिफेंस समझौते और S-400 मिसाइल पर फोकस
पुतिन की यात्रा में सबसे बड़ा फोकस डिफेंस समझौते पर होगा। रूस भारत को अपना SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने के लिए तैयार है। इसके अलावा S-500, ब्रह्मोस अगला वर्जन, वॉरशिप निर्माण और S-400 मिसाइल सिस्टम की नई डील पर चर्चा संभव है। S-400 सिस्टम पहले ही पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में प्रभावी साबित हो चुका है। पांच सिस्टम्स में से तीन भारत को मिल चुके हैं, जबकि चौथा स्क्वाड्रन रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण लंबित है।

ऊर्जा और पेमेंट सिस्टम पर चर्चा
इस दौरे में ऊर्जा सहयोग भी महत्वपूर्ण रहेगा। रूस भारत को सस्ता क्रूड ऑयल बेच रहा है, लेकिन अमेरिका और यूरोप के दबाव के कारण पेमेंट में कठिनाई आती रही है। दोनों देश नया पेमेंट सिस्टम बनाने पर सहमत हो सकते हैं, जिसमें रुपया-रूबल ट्रेड, डिजिटल भुगतान या किसी तीसरे देश के बैंक का इस्तेमाल शामिल हो सकता है। पुतिन भारत को आर्कटिक रीजन की ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश का मौका भी दे सकते हैं।

इंडियन वर्कर्स और तकनीकी सहयोग
भारत और रूस स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, साइंस-टेक्नोलॉजी और पोर्ट्स विकास पर भी बातचीत करेंगे। एक स्किल डेवलपमेंट समझौता के तहत भारतीय तकनीकी एक्सपर्ट, मेडिकल स्टाफ और इंजीनियर रूस में काम कर सकते हैं, जिससे भारत के लिए विदेश में नौकरी के अवसर बढ़ेंगे।
पुतिन की पिछली भारत यात्रा और सुरक्षा स्थिति
पुतिन आखिरी बार 6 दिसंबर 2021 को भारत आए थे, तब वे सिर्फ चार घंटे रहे। इस दौरान भारत और रूस ने 28 समझौते किए थे। 2023 में ICC ने पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया, जिसके बाद पुतिन ने कई देशों की यात्राओं से बचना शुरू कर दिया।
भारत-रूस द्विपक्षीय संबंध और व्यापार
दोनों देश ने 2025 तक सालाना 30 अरब डॉलर का व्यापार और 2030 तक 100 अरब डॉलर से अधिक वार्षिक व्यापार के लक्ष्य तय किए हैं। पीएम मोदी ने 2024 में दो बार रूस यात्रा की थी।





