अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च शिक्षा की प्रतिष्ठित रैंकिंग QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग – एशिया 2026 जारी हो गई है। इस बार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग ने पेकिंग यूनिवर्सिटी को पछाड़कर पहला स्थान हासिल किया है। रैंकिंग में इस साल 1,500 से ज्यादा विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें 550 से अधिक नई एंट्रीज शामिल हैं।

हॉन्गकॉन्ग की चमक, 5 यूनिवर्सिटीज टॉप 10 में
इस साल का सबसे बेहतर प्रदर्शन हॉन्गकॉन्ग की यूनिवर्सिटीज ने किया है। टॉप 10 में 5 यूनिवर्सिटीज हॉन्गकॉन्ग की हैं — जो किसी भी देश के लिए एक रिकॉर्ड है। पेकिंग यूनिवर्सिटी (चीन) दूसरे स्थान पर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) तीसरे स्थान पर रही। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हॉन्गकॉन्ग ने अपनी रिसर्च गुणवत्ता, फैकल्टी-स्टूडेंट अनुपात और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित करके यह उपलब्धि हासिल की है।
भारत की एक भी यूनिवर्सिटी टॉप 50 में नहीं
QS एशिया 2026 रैंकिंग में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी टॉप 50 में जगह नहीं बना पाई है। IIT दिल्ली इस सूची में भारत की सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली यूनिवर्सिटी है, जिसे 59वां स्थान मिला है। इसके बाद भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु को 64वीं रैंक प्राप्त हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में भारत का प्रदर्शन स्थिर तो रहा है, लेकिन कोई उल्लेखनीय सुधार देखने को नहीं मिला। शिक्षा विश्लेषकों का कहना है कि भारत की यूनिवर्सिटीज़ को रिसर्च आउटपुट, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, और फैकल्टी-स्टूडेंट रेश्यो जैसे क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
पाकिस्तान की 82 यूनिवर्सिटीज को लिस्ट में जगह
इस बार QS एशिया रैंकिंग में पाकिस्तान की 82 यूनिवर्सिटीज को शामिल किया गया है, जिससे वह छठे स्थान पर रहा है। संख्या के लिहाज से पाकिस्तान ने थाईलैंड और इंडोनेशिया को पीछे छोड़ दिया है। यह पिछले वर्षों के मुकाबले पाकिस्तान की उच्च शिक्षा प्रणाली में सुधार का संकेत है। क़ैद-ए-आजम यूनिवर्सिटी, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (NUST) और लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज (LUMS) जैसी संस्थाओं ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
चीन की 395 यूनिवर्सिटीज लिस्ट में शामिल
इस साल भी चीन का प्रदर्शन दबदबे वाला रहा। कुल 395 चीनी यूनिवर्सिटीज को सूची में शामिल किया गया है, जिनमें से कई शीर्ष 20 में हैं। चिंगहुआ यूनिवर्सिटी, पेकिंग यूनिवर्सिटी और झेजियांग यूनिवर्सिटी ने एशिया के टॉप 10 में अपनी जगह बनाए रखी। चीन ने लगातार शोध, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग सुधारने के लिए सरकारी निवेश में भारी वृद्धि की है।
जापान और साउथ कोरिया का संतुलित प्रदर्शन
जापान की 146 और साउथ कोरिया की 103 यूनिवर्सिटीज को इस लिस्ट में जगह मिली है। जापान की टोक्यो यूनिवर्सिटी टॉप 15 में शामिल रही, जबकि साउथ कोरिया की सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी (SNU) लगातार चौथे स्थान पर बनी हुई है। दोनों देशों ने शिक्षा के डिजिटलीकरण और अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंज प्रोग्राम्स पर जोर देकर अपनी स्थिति मजबूत की है।
भारत में 294 यूनिवर्सिटीज शामिल
भारत के लिए यह संतोष की बात है कि इस बार 294 भारतीय यूनिवर्सिटीज लिस्ट में आई हैं, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर संख्या है। हालांकि, इनमें से अधिकांश यूनिवर्सिटीज़ मध्य या निचले रैंक समूह में हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और IIT बॉम्बे ने टॉप 100 में अपनी स्थिति बनाए रखी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यूनिवर्सिटीज़ को ग्लोबल रिसर्च कोलैबोरेशन और शिक्षण गुणवत्ता पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि आने वाले वर्षों में रैंकिंग सुधारी जा सके।

QS रैंकिंग के मूल्यांकन मानदंड
QS एशिया यूनिवर्सिटी रैंकिंग में संस्थानों का मूल्यांकन 11 प्रमुख मानदंडों पर किया जाता है, जिनमें शामिल हैं:-
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एकेडमिक रेप्यूटेशन
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एम्प्लॉयर रेप्यूटेशन
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फैकल्टी-स्टूडेंट अनुपात
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रिसर्च पेपर प्रति फैकल्टी
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अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और छात्र अनुपात
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सस्टेनेबल इनिशिएटिव्स और ग्लोबल कोलैबोरेशन
इस रैंकिंग ने यह साफ कर दिया है कि एशिया का शिक्षा केंद्र अब हॉन्गकॉन्ग, चीन और सिंगापुर की ओर खिसक गया है। भारत की बड़ी संख्या में यूनिवर्सिटीज शामिल जरूर हुई हैं, लेकिन गुणवत्ता और रिसर्च स्तर पर अभी लंबा सफर तय करना बाकी है। यदि भारतीय उच्च शिक्षा संस्थान ग्लोबल मानकों पर ध्यान दें, तो अगले कुछ वर्षों में भारत टॉप 50 में वापसी कर सकता है।





