टोंक, संवाददाता: केशव राज सैन
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप करते हुए टोंक जिले में एक स्थानीय ढाबे के विध्वंस (डेमोलिशन) की प्रस्तावित कार्रवाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह आदेश माननीय न्यायालय ने गोपाल गुर्जर द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान पारित किया।
बिना नोटिस तोड़फोड़ की कार्रवाई—याचिकाकर्ता का गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अक्षय यादव ने अदालत को बताया कि प्रशासनिक अधिकारी ढाबे को बिना किसी पूर्व नोटिस और बिना प्रक्रिया का पालन किए तोड़ने की तैयारी में थे।उन्होंने यह भी बताया कि—
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वर्ष 2023 में इसी मामले में हाईकोर्ट ने पहले ही ढाबा मालिक के पक्ष में आदेश दिए थे।
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इसके बावजूद अधिकारी उन्हीं निर्देशों की अनदेखी कर मनमानी कार्रवाई करने में जुटे थे।
अधिवक्ता ने इसे “अवैध, मनमानी और न्यायालय की अवमानना जैसा कृत्य” बताया।
विधिक प्रक्रिया के उल्लंघन पर कोर्ट ने जताई नाराजगी
अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों—
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बिना नोटिस कार्रवाई,
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पूर्व आदेशों की अवहेलना,
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और विधिक प्रक्रिया का पालन न होने
को अत्यंत गंभीर माना।
इसी आधार पर Rajasthan High Court, Jaipur Bench ने स्पष्ट निर्देश जारी किए कि—“अगले आदेश तक ढाबे के संबंध में कोई भी तोड़फोड़, जबरन कब्जा या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की जाएगी।”
कोर्ट का अधिकारियों से सवाल—‘पूर्व आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों?’
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए पूछा है—
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पूर्व आदेशों की अवहेलना क्यों की?
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बिना नोटिस और बिना सुनवाई के तोड़फोड़ की तैयारी किस आधार पर की गई?
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क्या प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर मनमानी की है?
अदालत ने अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है, जिसे अगली सुनवाई में प्रस्तुत करना होगा।
वर्ष 2023 के पूर्व आदेश का भी दिया हवाला
याचिकाकर्ता और उनके अधिवक्ता का कहना है कि 2023 में हाईकोर्ट ने ढाबा तोड़ने से रोकने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसलिए वर्तमान कार्रवाई पूरी तरह से—
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अवैध,
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कानूनी प्रक्रिया के विपरीत,
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और अदालत की अवमानना की श्रेणी में आती है।
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अगली सुनवाई में प्रशासन को रखना होगा पक्ष
हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि मामले में प्रशासनिक जवाब बहुत महत्वपूर्ण होगा।अगली सुनवाई की तारीख जल्द जारी की जाएगी, जिसमें—
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संबंधित विभाग,
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अधिकारी,
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और कानूनी पक्ष
को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
निष्कर्ष: हाईकोर्ट का आदेश सामान्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का मजबूत संदेश
यह मामला प्रशासनिक मनमानी और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी को लेकर महत्वपूर्ण है।हाईकोर्ट के हस्तक्षेप ने यह संदेश दिया है कि—
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बिना नोटिस किसी भी निर्माण/ढाबे को गिराना अवैध है
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कोर्ट के पूर्व आदेशों की अवहेलना गंभीर अपराध है
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नागरिकों के अधिकारों की रक्षा न्यायपालिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है
टोंक में यह फैसला आमजन के लिए राहत की खबर है।
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