जयपुर | राजस्थान में हाल ही के दो बड़े हादसों ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और स्कूल सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। झालावाड़ के सरकारी स्कूल में बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से 7 बच्चों की मौत और जयपुर के प्राइवेट स्कूल में 9 साल की छात्रा अमायरा द्वारा चौथी मंज़िल से कूदकर जान देने की घटना के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। इन हादसों ने सरकारी और निजी स्कूलों में सुरक्षा, निगरानी और प्रबंधन की खामियों को उजागर कर दिया है। इसी पृष्ठभूमि में राजस्थान सरकार अब एक बड़ा और संरचनात्मक बदलाव करने जा रही है—स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी की स्थापना।
यह अथॉरिटी राज्य भर के लगभग एक लाख से अधिक सरकारी, निजी और प्राथमिक स्कूलों की निगरानी करेगी। इसका उद्देश्य न केवल छात्र सुरक्षा सुनिश्चित करना है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और प्रबंधन की जवाबदेही तय करना भी है। अधिकारियों के अनुसार यह अथॉरिटी स्कूलों में न्यूनतम मानकों को लागू करेगी ताकि आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

स्कूल सुरक्षा और गुणवत्ता सुधार को लेकर सरकार का सख्त रुख
स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी स्कूलों के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर निगरानी रखेगी। इसमें भवनों की सुरक्षा, बुनियादी ढांचे की स्थिति, कक्षाओं में उपलब्ध संसाधन, शौचालय व्यवस्था, पेयजल सहित सभी आवश्यक सुविधाओं का निरीक्षण शामिल होगा। शिक्षकों की योग्यता, छात्र-शिक्षक अनुपात और शैक्षणिक गुणवत्ता को भी इस अथॉरिटी के तहत परखा जाएगा। झालावाड़ और जयपुर की घटनाओं ने स्कूलों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है। 25 जुलाई को झालावाड़ में स्कूल भवन का हिस्सा गिरने से हुए दर्दनाक हादसे ने प्रशासन की आंखें खोल दीं। वहीं 1 नवंबर 2025 को नीरजा मोदी स्कूल में 9 साल की अमायरा की मौत ने प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधन और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए। इन दोनों घटनाओं ने स्पष्ट किया कि स्कूलों में नियमित निरीक्षण और कड़ी निगरानी बेहद जरूरी है।
27 सदस्यीय समिति ने तैयार किया विस्तृत ड्राफ्ट, NEP 2020 के मानकों पर होगी अथॉरिटी
शिक्षा विभाग ने हाल ही में 27 सदस्यीय समिति का गठन किया था, जिसका काम था देश के विभिन्न राज्यों में लागू स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी मॉडल का अध्ययन कर राजस्थान के लिए उपयुक्त ढांचा तैयार करना। समिति ने अब विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे आने वाली बैठकों में अंतिम रूप दिया जाएगा। यह ड्राफ्ट राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के दिशानिर्देशों पर आधारित है, ताकि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लाया जा सके। ड्राफ्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि स्कूलों में कठोर सुरक्षा मानकों का अनुपालन, योग्य शिक्षकों की उपलब्धता और पारदर्शी प्रबंधन सुशासन के लिए आवश्यक है।

स्कूल संचालन में आएगी पारदर्शिता, छात्र सुरक्षा होगी प्राथमिकता
प्रस्तावित स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी स्कूलों के संचालन में पारदर्शिता लाएगी। यह स्पष्ट करेगा कि किसी स्कूल में सुरक्षा या प्रबंधन की कमी होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी और किस स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यह कदम राजस्थान की शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा।
राज्य सरकार की मंशा है कि हर बच्चे को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानकों पर आधारित शिक्षा मिले। इस अथॉरिटी के गठन से आने वाले वर्षों में स्कूलों की व्यवस्था में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।





