बारां, संवाददाता: घनश्याम दाधीच
School Transport Safety आज पूरे राजस्थान की एक गंभीर चिंता है, और अंता क्षेत्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है। कस्बे में एक दर्जन से अधिक निजी स्कूल संचालित होते हैं, जिनमें से अधिकांश स्कूल बिना सुरक्षा मानकों के अनफिट मैजिक बाल वाहिनियों का उपयोग कर रहे हैं। बच्चों को क्षमता से कई गुना अधिक बैठाया जा रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
बाल वाहिनियों में अनियमितताओं की भरमार
अंता क्षेत्र में घूम रही कई मैजिक वैन— बिना फिटनेस,बिना दस्तावेज,बिना बीमा,बिना सुरक्षा उपकरण, चल रही हैं। इन वाहनों में School Transport Safety के किसी भी मानक का पालन नहीं किया जा रहा है।
क्यों बढ़ रहा है हादसों का खतरा?
जब स्कूल वैन में बच्चे क्षमता से अधिक बैठाए जाते हैं, तो—वाहन का संतुलन बिगड़ता है, ब्रेक फेल होने का खतरा बढ़ता है, तेज मोड़ पर वैन पलट सकती है, अंता में ऐसी स्थिति बेहद आम होती जा रही है, जो एक बड़ी दुर्घटना का संकेत देती है।
पूर्व की घटनाएँ और मौत का मामला
क्षेत्र में पहले दो–तीन घटनाएँ हो चुकी हैं। एक मामले में तो 11 वर्षीय छात्रा की मौत भी हो गई थी। इसके बाद School Transport Safety को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन उनका पालन अभी भी नहीं किया जा रहा।
विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश—पर पालन शून्य
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने साफ निर्देश जारी किए कि— क्षेत्रीय परिवहन विभाग,यातायात पुलिस,मिलकर बाल वाहिनियों का निरक्षण करे, अनफिट वाहनों को चालान या जप्ति करें। लेकिन अंता क्षेत्र में न कोई चालान हुए और न कोई वाहन जब्त हुआ। प्रशासन पूरी तरह मूक दर्शक बना हुआ है।
School Transport Safety नियम—किन्हें अनदेखा किया जा रहा है?
जारी निर्देशों के अनुसार बाल वाहन में होना चाहिए—फिटनेस प्रमाणपत्र,नई या सुरक्षित टायर,मजबूत ब्रेक,उपयुक्त लाइट्स,यांत्रिक परीक्षण,पूर्णतः पीले रंग का वाहन,स्कूल का नाम, पता, मोबाइल नंबर अंकित,सुरक्षित संरचना,खिड़कियों और दरवाजों की लॉकिंग प्रणाली,सीट क्षमता के अनुरूप बच्चे,लेकिन अंता क्षेत्र में इनमें से एक भी नियम का पूर्ण पालन नहीं हो रहा। School Transport Safety की अनदेखी इतनी गंभीर है कि कई वाहनों पर नंबर प्लेट तक टूटी हुई है।
चालक और वाहन स्थिति अत्यंत खराब
कई वाहन चालकों के पास—वैध ड्राइविंग लाइसेंस,पहचान दस्तावेज,वाहन पंजीकरण,बीमा,कुछ भी नहीं है। ऐसे में यह सोचना भयावह है कि हर रोज इन वाहनों में दर्जनों मासूम बच्चे यात्रा करते हैं।
परिवहन विभाग और पुलिस की भूमिका पर सवाल
प्रशासन की उदासीनता सबसे बड़ा प्रश्न है— क्या उन्हें खतरे की जानकारी नहीं? क्या निर्देशों की अवहेलना जानबूझकर की जा रही है? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के इंतज़ार में हैं ? School Transport Safety को गंभीरता से लागू नहीं किया गया तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है?
अंता में School Transport Safety की स्थिति चिंताजनक है। अनफिट वाहनों में बच्चों को ढोना सीधा-सीधा लापरवाही नहीं, बल्कि उनके जीवन से खिलवाड़ है। जब निर्देशों के बावजूद विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा, तो सवाल उठना स्वभाविक है— क्या प्रशासन किसी और बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार कर रहा है? जब तक परिवहन विभाग और यातायात पुलिस संयुक्त कार्रवाई नहीं करेंगे, बच्चे हर दिन खतरे में सफर करते रहेंगे।
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