शाहपुरा , संवाददाता :विजयपाल सैनी
राजस्थान के शाहपुरा स्थित राजकीय उप जिला अस्पताल के गेट नंबर दो को अचानक ताला लगाकर बंद कर दिया गया है, जिससे अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों, खासकर डिलीवरी केस वाली महिलाओं को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।राजकीय उप जिला अस्पताल में गेट नंबर दो के ठीक सामने ही डिलीवरी एवं प्रसव केंद्र स्थित है। आमतौर पर डिलीवरी मरीजों की एम्बुलेंस और परिजन इसी गेट से प्रवेश करते रहे हैं। यह रास्ता छोटा, सुविधाजनक और आपात स्थिति में सबसे तेज़ माना जाता था।लेकिन अब गेट पर ताला जड़ दिए जाने से प्रसूता महिलाएं और उनके परिवारजनों को मुख्य गेट नंबर एक से होकर अंदर आना पड़ रहा है, जिससे समय की बर्बादी और असुविधा दोनों हो रही हैं।
एम्बुलेंस चालकों को भी हो रही दिक्कतें
गेट नंबर दो बंद होने का असर केवल मरीजों पर ही नहीं बल्कि एम्बुलेंस चालकों पर भी पड़ा है। एम्बुलेंस को अब गेट नंबर एक से लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर इलाज पहुंचाने में बाधा आ रही है।एम्बुलेंस स्टाफ का कहना है कि अस्पताल का यह निर्णय समझ से परे है क्योंकि डिलीवरी और क्रिटिकल मरीजों के लिए सेकंड्स की कीमत जान से ज्यादा होती है।
मरीजों और परिजनों में आक्रोश
अस्पताल के आसपास मौजूद लोगों और मरीजों के परिजनों में नाराज़गी और आक्रोश देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में महिलाओं को गेट नंबर दो से ही लाना आवश्यक है, क्योंकि यह सीधे प्रसव कक्ष तक पहुंचता है।लोगों ने अस्पताल प्रशासन से गेट नंबर दो को तुरंत खोलने की मांग की है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को परेशानी न झेलनी पड़े।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
इस पूरे मामले पर जब राजकीय उप जिला अस्पताल शाहपुरा के पीएमओ डॉ. विनोद योगी से बात की गई तो उन्होंने बताया —“गेट नंबर दो पर सुरक्षा कारणों से ताला लगाया गया है। यह निर्णय अस्पताल की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर लिया गया है। हमारा उद्देश्य किसी को असुविधा देना नहीं है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है।”डॉ. योगी ने कहा कि यदि जनता को वास्तविक कठिनाई हो रही है तो इस पर विचार किया जाएगा और समुचित समाधान खोजा जाएगा।
स्थानीय लोगों की मांग: ‘सुरक्षा के साथ सुविधा भी जरूरी’
स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों का कहना है कि सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर मरीजों की सुविधा से समझौता नहीं किया जा सकता।लोगों का सुझाव है कि यदि प्रशासन को सुरक्षा की चिंता है तो गेट नंबर दो पर सुरक्षा गार्ड की तैनाती की जाए, लेकिन गेट को पूरी तरह बंद करना उचित नहीं है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की जरूरत
शाहपुरा जैसे कस्बे में जहां आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज आते हैं, वहां एक ही गेट से आवागमन होने पर भीड़ और अव्यवस्था बढ़ जाती है।विशेष रूप से महिला प्रसव केंद्र के पास यह स्थिति सुविधा से अधिक असुविधा पैदा कर रही है।गेट नंबर दो का बंद होना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि एक जनहित का मुद्दा बन गया है।मरीजों, परिजनों और एम्बुलेंस सेवाओं के हित में यह आवश्यक है कि अस्पताल प्रशासन जनता की आवाज सुने और सुरक्षा एवं सुविधा के बीच संतुलन बनाते हुए गेट को पुनः खोले।
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