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श्री चन्द्रभागा कार्तिक पशु मेला 2025 का हुआ शुभारंभ — संस्कृति, सम्पन्नता और समृद्धि का संगम

झालावाड़ जिले में रविवार को श्री चन्द्रभागा कार्तिक पशु मेला 2025 का रंगमंच मेला ग्राउंड पर भव्य उद्घाटन किया गया। उपखण्ड अधिकारी एवं मेला मजिस्ट्रेट अभिषेक चारण ने फीता काटकर मेले का शुभारंभ किया। मुख्य अतिथिद्वारा भूमि पूजन एवं झंडारोहण कर मेले की विधिवत शुरुआत की गई।उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अभिषेक चारण ने कहा कि “मेले का अर्थ ही मेलजोल है — यह सिर्फ व्यापार नहीं बल्कि संस्कृति, सम्पन्नता और एकता का प्रतीक है।”उन्होंने कहा कि झालरापाटन में आयोजित यह पारंपरिक मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि राजस्थान की ग्रामीण संस्कृति, पशुपालन परंपरा और लोक जीवन का भी जीवंत उदाहरण है।चारण ने कहा कि सभी व्यापारी, पशुपालक और आयोजक मिलजुलकर इस मेले को अनुशासन और सामाजिक समरसता के साथ मनाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “मेले का उद्देश्य धन संग्रह नहीं बल्कि संस्कृति और समृद्धि का पल्लवन है।”

 

देशभर में प्रसिद्ध है चन्द्रभागा मेला

पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक एवं मेला अधिकारी डॉ. टी.ए. बन्सोड ने बताया कि श्री चन्द्रभागा कार्तिक पशु मेला देश के शीर्ष 10 प्रमुख मेलों में गिना जाता है।यहां केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, गुजरात और हरियाणा से भी पशुपालक और व्यापारी बड़ी संख्या में आते हैं।इस मेला स्थल पर विदेशी पर्यटक भी विशेष रूप से लोक संस्कृति और पशु व्यापार को देखने पहुंचते हैं।उन्होंने बताया कि अब तक ₹1 करोड़ 31 लाख 16 हजार 699 रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है, जिसमें से करीब ₹13 लाख 17 हजार रुपए नगर पालिका झालरापाटन को विकास शुल्क के रूप में मिले हैं।पशुपालन विभाग द्वारा यह आयोजन 9 नवंबर तक चलेगा, इसके बाद 20 दिसंबर तक नगर पालिका प्रशासन मेले के संचालन की जिम्मेदारी संभालेगा।

 

उद्घाटन समारोह में मौजूद रहे गणमान्य अतिथि

कार्यक्रम में पूर्व विधायक निर्मल सकलेचा, डीएसपी हर्षराज सिंह खरेड़ा, पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक सिराज कुरैशी सहित कई विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी और पशुपालन विभाग के कर्मचारी उपस्थित रहे।श्री चन्द्रभागा कार्तिक पशु मेला 2025 न केवल पशुपालकों और व्यापारियों का संगम है, बल्कि यह राजस्थान की जीवंत परंपरा, संस्कृति और ग्रामीण आत्मा का प्रतीक है।मेले का मुख्य उद्देश्य सम्पन्नता, समृद्धि और संस्कृति को सशक्त बनाना है।

 

संवाददाता_रमेश चन्द्र बकानी

 

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