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सोशल मीडिया और ट्रैवल डिस्मॉर्फिया: आपकी छुट्टियों को खराब करने वाला नया ट्रेंड

आज के दौर में यात्रा सिर्फ घूमने-फिरने और मन को सुकून देने का तरीका नहीं रह गया है। सोशल मीडिया ने इसे एक ऐसी अनदेखी रेस में बदल दिया है जहां लोग खूबसूरत पलों को जीने के बजाय उन्हें “परफेक्ट फोटो” के रूप में पेश करने की चिंता में डूब जाते हैं।इसी वजह से एक नया मानसिक ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है— ट्रैवल डिस्मॉर्फिया।यह वह स्थिति है जब व्यक्ति अपनी ट्रिप की तुलना सोशल मीडिया पर देखे गए ‘परफेक्ट’ ट्रेवल कंटेंट से करता है और खुद को असंतुष्ट महसूस करता है, भले ही उसकी यात्रा वास्तविक रूप में शानदार ही क्यों न हो।

 

क्या है ट्रैवल डिस्मॉर्फिया?

‘ट्रैवल डिस्मॉर्फिया’ एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है, जिसमें यात्रियों को लगता है कि उनकी यात्रा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, ट्रेवल ब्लॉगर या दोस्तों की फोटोज़ जितनी अच्छी नहीं है।इसका असर व्यक्ति की मानसिक शांति पर पड़ता है और वह अपनी यात्रा के वास्तविक अनुभव से कट जाता है।सरल शब्दों में—आप यात्रा कम कर रहे हैं, और तुलना ज्यादा।”

 

सोशल मीडिया कैसे बढ़ा रहा है यह समस्या?

सोशल मीडिया आज हमारे हर फैसले को प्रभावित कर रहा है। यात्रा भी इसका अपवाद नहीं है।कुछ तरीके जिनसे सोशल मीडिया ‘ट्रैवल डिस्मॉर्फिया’ को बढ़ावा देता है: परफेक्ट दिखने की मजबूरीइंस्टाग्राम और टिकटॉक पर हर फोटोएडिटेड, फिल्टर लगी और प्लांड होती है।पहाड़, बीच, होटल रूम—सब कुछ रियल से ज्यादा ग्लैमरस दिखाया जाता है।लेकिन असली जिंदगी इतनी परफेक्ट नहीं होती, और यही अंतर तनाव पैदा करता है। FOMO (Fear of Missing Out)लोगों को लगता है कि वे दूसरों जितना मज़ा नहीं ले रहे, या वे उतने रोमांचक स्थानों पर नहीं जा रहे।तुलना करने की आदतदूसरों के ट्रेवल व्लॉग देखकर लोग अपनी यात्रा को “कमतर” मानने लगते हैं, जिससे dissatisfaction पैदा होती है। ट्रिप के दौरान कंटेंट बनाने का दबावयात्रा का आनंद लेने के बजाय लोगफोटो खींचने,वीडियो बनाने,रील तैयार करनेमें इतना व्यस्त हो जाते हैं कि यात्रा एक बोझ बन जाती है।

 

क्यों आप छुट्टी के बाद भी खुद को ‘अनहैप्पी’ फील करते हैं?

बहुत से लोग ट्रिप से लौटने के बाद भी खुश नहीं हो पाते और खुद से सवाल पूछते हैं—क्या मेरी ट्रिप अच्छी नहीं थी?”क्या मैंने समय खराब कर दिया?”इसकी वजहें हैं:सोशल मीडिया पर दिख रही फेक यात्रा की तुलनापरफेक्ट मोमेंट’ न मिलनावास्तविक यात्रा में आई चुनौतियाँ (भीड़, मौसम, थकान)उम्मीदों और हकीकत का अंतरयही अंतर ट्रैवल डिस्मॉर्फिया को जन्म देता है।

 

ट्रैवल डिस्मॉर्फिया के लक्षण

यदि आपकी ट्रिप के दौरान या बाद में ये चीज़ें होती हैं, तो आप भी प्रभावित हो सकते हैं:हर वक्त फोटो/video परफेक्ट बनाने का प्रेशरदूसरों की ट्रिप देखकर अपनी को बेकार लगनायात्रा में मज़ा कम और चिंता अधिकFOMO महसूस होनाछुट्टी के बाद भी असंतुष्टिवापस लौटकर उदासी महसूस होना

 

इससे कैसे बचें? ट्रिप को सोशल मीडिया नहीं, खुद के लिए जियें

ट्रैवल डिस्मॉर्फिया से बचना मुश्किल नहीं है, बस कुछ बदलाव जरूरी हैं:यात्रा कंटेंट की तुलना बंद करेंहर इन्फ्लुएंसर के पीछे बड़ी टीम, पैसा और एडिटिंग होती है।यात्रा को ‘एंजॉय’ करें, ‘कैप्चर’ नहींफोटो लें, लेकिन उसका दवाब न बनाएं।सोशल मीडिया डिटॉक्स अपनाएंट्रिप के दौरान ऐप्स से दूर रहें। उम्मीदों को वास्तविक रखेंपरफेक्ट फोटो नहीं, परफेक्ट यादें बनाएं।यात्रा के वास्तविक पलों को स्वीकारेंभीड़, मौसम, ट्रैफिक—ये भी यात्रा का हिस्सा हैं।

 

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