बारां, संवाददाता: जयप्रकाश शर्मा
मांगरोल तहसील क्षेत्र के गांवों में इन दिनों stray cattle menace किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। सरकार द्वारा खरीफ फसल में नुकसान मुआवजा और कर्ज माफी की घोषणाओं से किसानों को भले ही थोड़ी राहत की उम्मीद जगी हो, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं। आवारा पशु खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर रहे हैं और किसान रात-रात भर जागने को मजबूर हैं।
सरकार की घोषणाएं और जमीनी हकीकत
प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए मुआवजा और कर्ज माफी जैसी घोषणाएं जरूर की हैं, लेकिन कई किसानों के बैंक खातों में अब तक यह राशि नहीं पहुंची है। दूसरी ओर stray cattle menace के कारण किसानों को हर दिन नया नुकसान झेलना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर होती जा रही है।
रात में फसलें चौपट करते आवारा पशु
किसान दिन-रात मेहनत कर फसल उगाता है, लेकिन रात के अंधेरे में आवारा पशु खेतों में घुसकर पूरी फसल चौपट कर देते हैं। गांवों में पिछले कई वर्षों से यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। सांड, नीलगाय और अन्य पशु खेतों में खड़ी फसलों को चट कर जाते हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत एक ही रात में बर्बाद हो जाती है।
मचान बनाकर फसल बचाने की मजबूरी
stray cattle menace से फसल बचाने के लिए किसानों ने अब खेतों में मचान बनाना शुरू कर दिया है। पत्थर की पट्टियां जमीन में गाड़कर ऊंचे मचान बनाए जा रहे हैं, ताकि खेत पर दूर तक नजर रखी जा सके। किसान रातभर इन मचानों पर बैठकर टॉर्च के सहारे फसलों की निगरानी करते हैं।
कड़ाके की ठंड में किसानों का संघर्ष
जहां कड़ाके की ठंड में आम लोग बंद कमरों में रजाइयों में दुबके रहते हैं, वहीं किसान खुले खेतों में मचान पर बैठकर रात गुजारने को मजबूर हैं। बोहत गांव के किसान नवल सुमन, चेतन सुमन और भीमराज सुमन बताते हैं कि stray cattle menace ने उन्हें पूरी रात जागने के लिए मजबूर कर रखा है।
तारबंदी भी साबित हो रही बेकार
फसलों को बचाने के लिए कई किसानों ने खेतों की तारबंदी भी करवाई है, लेकिन यह उपाय भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो रहा। आवारा सांड और अन्य पशु तारबंदी को तोड़कर खेतों में घुस जाते हैं और फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। किसानों का कहना है कि stray cattle menace के आगे तारबंदी भी टिक नहीं पा रही।
वन्यजीवों से भी बढ़ा खतरा
किसानों के अनुसार मचान की ऊंचाई से दिन और रात दोनों समय खेतों में घुसे पशु आसानी से दिखाई देते हैं। टॉर्च की रोशनी में नीलगाय, जंगली सुअर और हरिण जैसे वन्यजीव भी नजर आ जाते हैं। यदि जमीन पर रहकर रखवाली की जाए तो दूर से आने वाले पशु दिखाई नहीं देते, जिससे नुकसान और बढ़ जाता है।
किसानों की सेहत पर पड़ रहा असर
रात-रात भर जागने और सर्द मौसम में खुले में रहने से किसानों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है। किसान सागर चौधरी, कौशल चौधरी और ओमप्रकाश सुमन का कहना है कि नींद पूरी न होने से मानसिक तनाव बढ़ रहा है। साथ ही तेज ठंड में खुले में रहने से कोल्ड स्ट्रोक जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। stray cattle menace अब सिर्फ फसल का नहीं, बल्कि किसानों की सेहत का भी संकट बन चुका है।
गोशाला खोलने की मांग
किसानों का कहना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान गोशाला खोलकर ही किया जा सकता है। यदि क्षेत्र में गोशालाएं स्थापित की जाएं और आवारा पशुओं को वहां रखा जाए, तो किसानों को रातभर जागकर फसल की रखवाली नहीं करनी पड़ेगी। लंबे समय से किसान इस मांग को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
प्रशासन से उम्मीद और सवाल
मांगरोल क्षेत्र के किसान प्रशासन और सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि stray cattle menace से जल्द निजात दिलाई जाएगी। सवाल यह है कि क्या किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए यूं ही मचान पर रातें गुजारनी पड़ेंगी, या फिर सरकार कोई ठोस समाधान निकालेगी। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा।
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