जोधपुर, संवाददाता : मिथुन रील, बिलाड़ा
Teacher Shortage Crisis राजस्थान के कई सरकारी विद्यालयों में वर्षों से बनी समस्या है, लेकिन जैतीवास के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में यह संकट अब बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। पिछले कई महीनों से विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। बोर्ड परीक्षा नजदीक है, लेकिन विद्यार्थियों को उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा। स्कूल की शिक्षा व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है। अध्यापकों की कमी केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य को प्रभावित करने वाला बड़ा संकट बन चुका है। ऐसे में यह Teacher Shortage Crisis शिक्षा के अधिकार पर सबसे बड़ा प्रश्न चिह्न है।
मुख्य विषयों के अध्यापक रिक्त—बच्चों की पढ़ाई पर भारी असर
Teacher Shortage Crisis का सबसे सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ा है। विज्ञान और गणित जैसे कठिन विषयों के बिना विद्यार्थी कोर्स पूरा नहीं कर पा रहे। अंग्रेजी विषय का शिक्षक महीनों से नियुक्त नहीं किया गया, जिससे विद्यार्थियों की भाषा कौशल पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। परीक्षा नजदीक होने के बावजूद कक्षाएँ नियमित रूप से नहीं चल पा रहीं। परिणामस्वरूप बच्चे तनाव में हैं और उनकी तैयारी अधूरी है।
ग्रामीणों का विरोध: विद्यालय में तालाबंदी
स्थिति अत्यधिक बिगड़ते देख आज ग्रामीणों ने एकजुट होकर विद्यालय में ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। यह Teacher Shortage Crisis स्थानीय लोगों की सहनशक्ति से बाहर हो चुका था। ग्रामीणों का कहना है कि वे महीनों से शिक्षा विभाग को लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में उन्हें तालाबंदी जैसी कठोर कार्रवाई करनी पड़ी है। ग्रामीणों का यह संदेश स्पष्ट है— “जब तक शिक्षक नहीं आएंगे, स्कूल नहीं खुलेगा।”
विद्यार्थियों की आवाज़: परीक्षा नजदीक, तैयारी अधूरी
इस Teacher Shortage Crisis का सबसे दुखद पहलू यह है कि विद्यार्थी खुद कह रहे हैं कि उनकी परीक्षा की तैयारी अधूरी है। वे बताते हैं कि: मुख्य विषयों के अध्यापक नहीं, कठिन विषयों पर मार्गदर्शन नहीं, पाठ्यक्रम पूरा नहीं, प्रैक्टिकल की तैयारी नहीं, बच्चों ने कहा कि वे भविष्य को लेकर चिंतित हैं और बिना अध्यापक पढ़ाई संभव नहीं है।
शिक्षा विभाग की भूमिका और लापरवाही पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने इस Teacher Shortage Crisis को गंभीरता से नहीं लिया। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद स्थाई या अतिथि शिक्षक तक नियुक्त नहीं किए गए। विभाग की लापरवाही के कारण: स्कूल की पढ़ाई प्रभावित, बोर्ड परीक्षा खतरे में, विद्यार्थी मानसिक दबाव में, ग्रामीणों का भरोसा टूट रहा है शिक्षा विभाग को इस मामले में तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि संकट और न बढ़े।
संकट का समाधान: ग्रामीणों की मांग और प्रशासनिक अपेक्षाएँ
ग्रामीणों की मांगें स्पष्ट हैं: विज्ञान, गणित, अंग्रेजी के स्थाई अध्यापक भेजे जाएँ, जब तक स्थाई नियुक्ति न हो, अतिथि शिक्षक लगाए जाएँ, स्कूल प्रबंधन को मजबूत किया जाए, बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू की जाए ,ग्रामीण चेतावनी दे चुके हैं कि जब तक Teacher Shortage Crisis समाप्त नहीं होता, उनका विरोध जारी रहेगा।
शिक्षक कमी का व्यापक प्रभाव
भारत में Teacher Shortage Crisis नई समस्या नहीं है। UNESCO और विभिन्न शैक्षिक संस्थाओं की रिपोर्ट बताती है कि शिक्षक-कमी का सीधा असर: परीक्षा परिणामों पर, शिक्षा की गुणवत्ता पर, विद्यार्थियों की मानसिकता पर, ड्रॉपआउट दर पर
Teacher Shortage Crisis जैतीवास स्कूल के विद्यार्थियों के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। स्कूल में मुख्य विषयों के अध्यापक न होना शिक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता दर्शाता है। ग्रामीणों का विरोध उचित है और उनकी आवाज़ बच्चों के हित में है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि तुरंत अध्यापकों की नियुक्ति कर इस संकट का समाधान करे, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावी और निरंतर बनी रहे |
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