कोटा,संवाददाता: तेजपाल सिंह बग्गा
Tiger Rescue Operation मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में तब शुरू हुआ जब बाघिन कनकटी MT-8 एन्क्लोज़र से बाहर निकलकर खुले क्षेत्र में दिखाई देने लगी। उसके मूवमेंट ने वन विभाग और स्थानीय लोगों दोनों के लिए चिंता बढ़ा दी, क्योंकि यह वही बाघिन है जिसने रणथंभौर में पहले रेंजर और एक बालक की जान ले ली थी।
बाघिन MT-8 कनकटी कैसे पहुंची एन्क्लोज़र से बाहर?
बाघिन मुकुंदरा के 82 वर्ग किलोमीटर के एन्क्लोज़र से बाहर निकल गई थी। अनुमान है कि फेंसिंग के किसी कमजोर हिस्से का फायदा उठाकर वह बाहर आई और अमझार तथा झामरा वैली क्षेत्र की ओर मूव कर गई।
हाईवे और रेलवे ट्रैक के पास बढ़ा खतरा
Tiger Rescue Operation इसलिए और चुनौतीपूर्ण बन गया, क्योंकि MT-8 दिल्ली–मुंबई रेलवे लाइन और नेशनल हाईवे NH-52 के बेहद पास मूव कर रही थी। इससे— बाघिन को भी खतरा, और आम नागरिकों को भी जान का जोखिम, दोनों बढ़ गया था। इसलिए उसे जल्द से जल्द ट्रेंकुलाइज करना आवश्यक था।
दो दिन का सघन रेस्क्यू ऑपरेशन
वन विभाग की टीम ने लगातार दो दिन तक रेडियो टेलीमेट्री (कॉलर) के माध्यम से MT-8 की मूवमेंट मॉनिटर की। हर बदलाव पर फील्ड टीमों को अलर्ट किया गया। ट्रैकिंग टीम एक ऐसे स्थान की तलाश में थी, जहाँ बाघिन को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज किया जा सके।
बाघिन MT-8 को ट्रेंकुलाइज करने की प्रक्रिया
अंततः वन विभाग की टीम को सही पोज़िशन मिली और विशेषज्ञों ने MT-8 को ट्रेंकुलाइज किया। ट्रेंकुलाइजिंग के बाद तत्काल उसकी मेडिकल जांच की गई— हृदयगति, श्वसन, तापमान, संपूर्ण शारीरिक स्थिति, सब सामान्य पाई गईं। Tiger Rescue Operation का यह सबसे संवेदनशील चरण सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
एन्क्लोज़र में शिफ्टिंग और पोस्ट-हेल्थ चेकअप
बाघिन को सुरक्षित रूप से वाहन में लादा गया और दोबारा मुकुंदरा के 82 वर्ग किलोमीटर के एन्क्लोज़र में पहुंचाया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी निरंतर निगरानी कर रही है। उसे जागने के बाद भी CCTV और ग्राउंड टीम द्वारा मॉनिटर किया जा रहा है।
वन विभाग की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था
एन्क्लोज़र की फेंसिंग की मरम्मत की जा रही है ताकि दोबारा ऐसा हादसा न हो। उपवन संरक्षक मुथु सोमासुंदरम ने बताया— “टीमें आगे भी सघन निगरानी जारी रखेंगी।”, “बाघिन के हर मूवमेंट पर नज़र रखी जाएगी।” इससे मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
बाघिन कनकटी की उत्पत्ति: ऐरोहेड T-84 की बेटी
बाघिन MT-8 कनकटी रणथंभौर टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध ऐरोहेड (T-84) की बेटी है। T-84 अपने जज़्बे, शिकार कौशल और साहस के लिए जानी जाती है। इसलिए MT-8 का व्यवहार भी बेहद सक्रिय और एग्रेसिव माना जाता है। यही कारण है कि उसका खुला मूवमेंट लोगों के लिए खतरनाक हो सकता था।
Tiger Rescue Operation की सफलता वन विभाग के साहस, प्रोफेशनलिज्म और निरंतर निगरानी का परिणाम है।
बाघिन MT-8 को सुरक्षित एन्क्लोज़र में वापस शिफ्ट कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता कम हुई है और बाघिन भी सुरक्षित वातावरण में रह सकेगी। यह घटना एक बार फिर बताती है कि मानव और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन कितना आवश्यक है।
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