टोंक, संवाददाता: केशवराज सैन
tonk longest bridge के रूप में पहचाना जाने वाला गहलोद हाई लेवल ब्रिज अब पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है। यह पुल राजस्थान में नदी पर बना अब तक का सबसे लंबा पुल है, जिसे जिले के गहलोद गांव के पास बनास नदी पर बनाया गया है। चार साल में तैयार हुए इस पुल से वाहनों की आवाजाही शुरू हो चुकी है, जबकि नए साल में इसका आधिकारिक उद्घाटन प्रस्तावित है। यह पुल न केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि है, बल्कि टोंक जिले के लिए विकास की नई राह भी खोलता है।
गहलोद हाई लेवल ब्रिज की प्रमुख विशेषताएं
गहलोद हाई लेवल ब्रिज का निर्माण करीब 134.7 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह पुल 51 पिलरों पर टिका है, जिसकी मुख्य लंबाई 2 किलोमीटर और चौड़ाई 13 मीटर है। इसके साथ ही 12 फीट चौड़ा फुटपाथ भी बनाया गया है। tonk longest bridge की एप्रोच सड़क करीब 1350 मीटर लंबी है। एप्रोच को मिलाकर पुल की कुल लंबाई 3.135 किलोमीटर से अधिक हो जाती है, जो इसे राजस्थान का सबसे लंबा पुल बनाती है।
चार साल में पूरा हुआ 135 करोड़ का प्रोजेक्ट
सार्वजनिक निर्माण विभाग के अनुसार इस पुल को केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त फंड से बनाया गया है। वर्ष 2021 में इसे स्वीकृति मिली थी और चार वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद अब इसका निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। tonk longest bridge का निर्माण समयसीमा में पूरा होना विभाग के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
अब रपट बंद होने से नहीं रुकेगा यातायात
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता दीन मोहम्मद ने बताया कि पहले बनास नदी में पानी आने पर रपट पर यातायात पूरी तरह बंद हो जाता था। उस स्थिति में लोगों को सोहेला होकर 20 से 30 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। अब tonk longest bridge बनने से नदी में पानी होने के बावजूद यातायात निर्बाध रूप से जारी रहेगा।
टोंक जिले की तहसीलों को मिलेगा सीधा लाभ
इस पुल से टोंक, टोडारायसिंह, मालपुरा और पीपलू तहसील क्षेत्र की करीब 10 लाख आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। इन क्षेत्रों का जिला मुख्यालय से परिवहन संपर्क अब और आसान हो जाएगा। tonk longest bridge के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और विकास को गति मिलेगी।
दूरी और समय में बड़ी बचत
इस पुल के चालू होने से टोंक जिला मुख्यालय आने-जाने में 10 से 40 किलोमीटर तक की दूरी कम हो जाएगी। पहले लोगों को सोहेला मार्ग से घूमकर आना पड़ता था, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती थी। अब tonk longest bridge से यात्रा सीधी, सुरक्षित और कम समय में पूरी हो सकेगी।
चंबल और झरेल नदी के पुलों से भी बड़ा
अब तक राजस्थान का सबसे लंबा पुल कोटा-बूंदी को जोड़ने वाला गेंता माखीदा पुल था, जिसकी लंबाई लगभग 1562 मीटर है। झरेल नदी पर बन रहा 1880 मीटर लंबा पुल भी गहलोद पुल से छोटा है। इस प्रकार tonk longest bridge ने राजस्थान में नदी पर बने पुलों का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।
नए साल में होगा आधिकारिक उद्घाटन
पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता एचएल मीणा ने बताया कि पुल का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। नए साल में रोड टेस्ट के बाद इसका आधिकारिक उद्घाटन कर दिया जाएगा। हालांकि, लोग पिछले कुछ दिनों से tonk longest bridge से होकर आवागमन कर रहे हैं।
लोगों की वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस पुल की मांग लंबे समय से की जा रही थी। अब इसके बनकर तैयार होने से जिले के आधे हिस्से के लिए यह पुल “मील का पत्थर” साबित होगा। बेहतर परिवहन, कम दूरी और समय की बचत के कारण tonk longest bridge टोंक जिले के विकास में अहम भूमिका निभाएगा।
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